Tag: Sad Poems

Gum Poem – कुछ हमें भी बाँट लेने दे – Poem on Loneliness

Gum Poem – Poem on Loneliness Gum Poem कौन सा ख़लिश लिए फिरता है दिल कुछ हमें भी बाँट लेने दे शहर मे ऐसे ग़म बहुत है ना ढो कंधे अकेले कुछ हमको भी ढो लेने दे। होंटो मे हर कुछ तो बयां नही होता जिंदगी मे रंग इतने है यारों हर कोई रंगा तो

Wounds Poem – कोई जख्मो पे किताब – Sad Poem in Hindi

Wounds Poem – Sad Poem in Hindi Wounds Poem कोई जख्मो पे किताब लिखता है मैं सीने में दफ्न करके सोता हूँ कोई जख्मो से दिवार रंगते है मैं मुस्कुराहोटो में बिकता हूँ। लोग दर्द कही आँखों से बयां करते है मैं बरसात पे ऊँगली उठता हूँ। कही शहर बहते है गम के पैमाने में

Sad Poem About Life in Hindi – जब आँख खुली थी – Hindi Kavita

Sad Poem About Life in Hindi – Hindi Kavita Sad Poem About Life in Hindi जब आँख खुली थी कचरा कचरा ही हर तरफ किसीको शायद मेरी आवाज शुनाईदी रख छोड़ा था इस अनाथालय में। बचपन से जवानी कि चौखट पार कि इस अनाथ दुनिया में आंसुओ के लफ्ज़ नही थे बस हाथ पैर थे

Relationship Poetry – ऐसे जो बिछड़े हो – Sad Poetry in Hindi

Relationship Poetry – Sad Poetry in Hindi Relationship Poetry ऐसे जो बिछड़े हो मैं यूँ तन्हा फलसफे बना डाली अब तो रिश्तों को! क्या दरकार ये जिंदगी यूं मौसम बनना वहशत मे छोड़ डाली अब दिन महिनों को! एक अकेला को समझना मुश्क़िल इतना दरिया मे डुबो डाली अब समझदारी को! बेचैन है रूह के

Jativad Par Kavita – तथाकथित दलित – Feminism Poem

Jativad Par Kavita – Feminism Poem Jativad Par Kavita इन चार चिकल्लिस चौघडियों के लोग मवेशी लगते हैं तुम जिन्हें सूरमा समझ रहे वो हाथ विदेशी लगते हैं छोड़ा था जिन्हें हिदायत दे रेबीजी कट्टर ही निकले ये नामाराशी फडनवीस आखिरकर खट्टर ही निकले इस बार बने हैं दलित ढाल कल को पिछड़े हो सकते

Dard Poem – दिले दर्द न समझा बेदर्दी – Sad Poem on Love

Dard Poem – Sad Poem on Love Dard Poem दिले दर्द न समझा बेदर्दी, दीवाना ही दिल तोड़ गया। हमसफ़र जिसे माना दिल ने मेरे, वही बीच सफ़र में तन्हां छोड़ गया।। दास्ताने मोहब्बत सुनाऊँ क्या? क्या किया उसने तुमको बताऊँ क्या? प्यार में वादे पे वादे वो करता रहा, फिर सारे ही वादे तोड़

Sad Poetry in Hindi – कल रात – Hindi Kavita

Sad Poetry in Hindi – Hindi Kavita Sad Poetry in Hindi कल रात जकड़ लिया अंधेरों ने बेबसी को आलिंगन में बलात् कल रात बंद हो गई कराह, उजालों की मद्धम होते होते सड़क ने सुनी थी दर्द की चीख रोते रोते कल रात बुझ गई रौशनी अस्मिता बचाने के निर्णायक युद्ध में सुबह की

Sad Poems : कैसे कोयल के गीत लिखूं – Poem About Life in Hindi

Sad Poems – Poem About Life in Hindi Sad Poems कैसे कोयल के गीत लिखूं भौरों की कैसे प्रीत लिखूं चिंतित ठहरा है वर्तमान कैसे भविष्य कल्पनातीत लिखूं सूरज की लालिमा खूनी है झरनों का कैसे संगीत लिखूं रातें लगती जब खौफनाक चाँदनी को कैसे शीत लिखूं दो पल भी साथ लगे भारी कैसे तुम्हें मन

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