Tag: Sadness Poetry

Statue Poem – बूत बने बैठे हो आप – Sad Poem in Hindi on Life

Statue Poem – Sad Poem in Hindi on Life Statue Poem बूत बने बैठे हो आप, ये शहर ए मुहब्बत है, और तुम जान छुड़ाके बैठे हो। दिल मे पत्थर ना रखो, दिल तो मोम का बिसात है, बस कुछ अपना कुछ शहर का पिघल ने दो। कातिलों के निगाहों से ये शहर ना देखो,

Mehndi Poem – Poem on Sadness and Loneliness

Mehndi Poem – Poem on Sadness and Loneliness Mehndi Poem रात के हीना जल रही थी पकना था हाथो में पर क्या करता शराबी अंगारो में जल के खाक हो गया कोई घरौंदे राख हो गया। उन्माद शहर गुलाबी हसरतों में मसरूफ गलिओं में रौशनी तो बहुत है बस इमां दफ्न है कालिख पड़ चुकी

Bharat Mata Poem – भारत माता – Hindi Poem on Bharat Desh

Bharat Mata Poem – Hindi Poem on Bharat Desh Bharat Mata Poem मैने एक दुःसवप्न देखा! भारत माता का आँचल जलता देखा! घिरी थी आग की लपटों मे, खडे थे तमाशबीन चौबारे में! अपनी निर्लजता, वहशीपन, कट्टरता लिये आखों मे, सर्द हवाओं में! भिगीं आँखे, नतमस्तक थी, अविरल अस्रुधार बही अपनी संतानों के आगे बेबस

Heart Poems – दिल में ज़ख़्म है – Ghazal Poem in Hindi

Heart Poems – Ghazal Poem in Hindi Heart Poems दिल में ज़ख़्म है भी तो दिखा कर क्या फ़ायदा, जो हमें समझते ही नहीं उन्हें जता कर क्या फायदा। उनकी नज़रों ने हमारा कत्ल-ए-आम कर दिया, अब ये तिरछी निगाहें हटा कर क्या फायदा। आख़िर में दिल का यही हश्र होना था अगर, सारी दुनिया

Winter Poem – कोहराम – Hope Poem in Hindi

Winter Poem – Hope Poem in Hindi Winter Poem इस कदर क्यों ये शहर बदनाम है आज हर तरफ आज कोहरा है हर तरफ कोहराम है । दूर से हर दिशा एक सी लगती है, हर तरफ एक से रास्ते सफ़ेद पोशाक ओढ़े नज़र आते हैं । लगता है हवाओं को भी सर्द मौसम की

Sober Poem – मेरी सिसकियों को अक्सर – Sadness Poetry

Sober Poem – Sadness Poetry Sober Poem मेरी सिसकियों को अक्सर राग में बदल देती है, मेरी ग़ज़लें मेरे आँसुओं को आग में बदल देती हैं। तुम्हारी तन्हाई तो बुझा देती होंगीं तुम्हें भी, मेरी तन्हाई को तो ये जलते चिराग में बदल देती है। ज़िंदगी हमेशा करेले सी कड़वाहट परोसा करती है, ये तो

Sad Hindi Kavitayen – चटकता है हर रोज कुछ – Hindi Kavita

Sad Hindi Kavitayen – Poem in Hindi language Sad Hindi Kavitayen चटकता है हर रोज कुछ, ढहा ले जाता है एक टुकड़ा मन की मिट्टी का, वो सैलाब आँसुओ का। जो घुमड़ता है भीतर ही भीतर, निकलने नही देती, आँखों के रास्ते वो मजबूत मेड़ लोक लाज की। बस रुँध जाता है गला, और अटक

Sad Life Poem – दुःख का प्रहार – Sad Poetry About Life in Hindi

Sad Life Poem – Sad Poetry About Life in Hindi Sad Life Poem प्रिय तुम सदा पूछते रहे हो मुझसे सुख और दुःख का सार मगर व्यापक अध्ययन, मनन और अनुभव के बाद भी मैं न गढ़ सका सुख और दुःख की सटीक परिभाषा और न तय कर सका इनके अस्तित्व का सार आज भी

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