Umeed Poetry – उम्मीद – Poem on Hope and Faith

Umeed Poetry – Poem on Hope and Faith

Umeed Poetry

जब किसिपे कोई उम्मीद करना,
हाथ से दिल अपना संभाले रखना,
टूटता है जो हज़ार टुकड़ो में,
हर एक टुकड़े का तुम हिसाब रखना,
जब किसिपे कोई उम्मीद करना.

जब किसी हसीं चेहरे से भरोसा करना,
अपने दामन में आंसू कुछ छुपाये रखना,
बिखरता है जो कोई पहली बार ए इश्क़,
शहर में एक और दीवाने की नाम रखना,
जब किसिपे कोई उम्मीद करना.

जब किसी पर तुम एतबार करना,
अपनी मौत पर ना कोई शिकवा रखना,
मरता है जब कोई समंदर यूँही प्यासा,
पीनेवालों बस एक उसके नाम पर रखना,
जब किसिपे कोई उम्मीद करना.

जब किसिपे कोई उम्मीद करना,
हाथ से दिल अपना संभाले रखना.

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