Umeed Poetry – एक उम्मीदों का शहर Sad Poem in Hindi on Life

Umeed Poetry – Sad Poem in Hindi on Life

Umeed Poetry

एक उम्मीदों का शहर नही मिलता,
उम्मीदे जलता पर बसर नही मिलता।

कंधे का सर नही मिलता,
नही होता साये अपना,
दीवारें तो झूटी दिलासा है,
कोई रहगुजर नही मिलता।

उम्मीदों पे दिल नही रखना,
मीठी जहर है उम्मीदे,
धड़कनो कि आवाज तक नही मिलता।

दर्द होती है गर पिलो घूंट के,
कोई बाँट ले ऐसी फरीद नही मिलता।

रशीद कहता फ़क़ीर बन जा,
दिल ये कहता पत्तर बन जा,
किसका सुनु कोई जबाब नही मिलता।

उम्मीदे जहर से कुछ कम नही,
ख्वाहिसे खंजर से कुछ कम नही,
जो टूट जाये तो कम्बकत मौत भी नही मिलता।

आसमां कि चाह रखते है सब,
परिंदो कि आँख रखते है सब,
हर किसीको मर्ज़ी का उड़ान नही मिलता।

उम्मीदे करो लहू से अगर,
उम्मीदे रखों सांस पे अगर,
जान निकले भी तो कोई हमनवाज नही मिलता।

क्या करू ख़ुदा ना हो तो जियु कैसे,
ना हो तो ये सफ़र तन्हा चलु कैसे,
कुछ तो कर ख़ालिक़ तुझे बन्दों का बस्ता,
ना करेगा कुछ तो कब्र पर,
यहाँ कफ़न तक नही मिलता।

एक उम्मीदों का शहर नही मिलता,
उम्मीदे जलता पर बसर नही मिलता।

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