Water Poem – पानी का रंग नीला परा है – Ghazal Poem in Hindi

Water Poem – Ghazal Poem in Hindi

Water Poem

पानी का रंग नीला परा है,
जहर ये नीला कम लगता है,
अब किसको कोसु कौन गबाह है,
ये प्यास पुराना आच्छा लगता है।

पानी का रंग……

उची मंजिल पत्थर के सड़के,
हरियाली अब फीका लगता है,
दिन लम्बी है रात छोटी अब,
गुजरा कल कहानी लगता है।

पानी का रंग……

प्यार मुहब्बत बक्से में बंद सब,
रिश्ता यहाँ अब बोझ लगता है,
दादा दादी दीवारों में दीखते,
बचपन अब कही गुम लगता है।

पानी का रंग……

फ़ुरसत नही सब भाग रहे है,
जिन्दा नही कोई सब पुतला लगता है,
दर्द अगर हो बाँट नही सकते,
घूंट घूंट के मरना जिन्दगी लगता है।

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