Wind Poem – सनसनाती हवा – Ghazal Poem in Hindi

Wind Poem – Ghazal Poem in Hindi

Wind Poem

सनसनाती हवा,
खिलखिलाती फिजा,
सुनो क्या कह रही है,
कोई करीब आ रही है।

खिड़की में से चाँद हमसे कुछ कहा,
जो छुया चाँदनी,
मदहोश ये दिल हुआ,
देख ये शमा गा रही है,
कोई करीब आ रही है।

जुगनुओ की बाराती,
सितारे झिलमिलाती,
गुम होश हो रही है,
कोई करीब आ रही है।

ये रात चुप नही है,
एक खामोश सरगम है,
रात रानी महक रही है,
कोई करीब आ रही है।

मैंने दिल से कहा,
जोर धड़कना नही,
शर्त रखा साँसों पे,
अभी रुकना नही,
मेरे ख़्वाब उतर रही है,
कोई करीब आ रही है।

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