Winter Evening Poem – एक अकेली सर्द शाम है Poem Song Lyrics

Winter Evening Poem – Poem Song Lyrics

Winter Evening Poem

एक अकेली सर्द शाम है,
तू नही पर तेरा याद है,
तेरे यादों की गर्माहट रेंगती है अबतक,
जैसे तू कही आसपास है,
एक अकेली………

चाँद मिलता है रोज़,
पूछता है तेरी बात,
वो चांदनी वो मुलाकात,
मेरा खोया मुस्कराहट,
मेरा दिल कि बात,
एक अकेली………

कह देता आँखों में नमक,
कह देता तेरे नाम पर,
वो चेहरे पे चमक,
कह देता मेरे धड़कन खामोश,
कह देता मेरे साँसों के महक,
एक अकेली………

मेरे गुनगुनाते संगीत,
वो लम्हो के रेत,
मेरे जुस्तजू मेरे प्रीत,
बाँध रखा वक़्त कि डोर मुझको,
वादा था के आएगी,
वो शाम साथ मनमीत,
एक अकेली………

ये हवा भी पूछ लेती है दिलसे,
फ़िज़ा भी ढूंढती फिरती है दिलसे,
क्या कहु ये दिल ही तो वो है,
जरा पास गुजर धड़कनो के,
एक एक धड़कन कि राग वो है,
एक अकेली………

कहा जाना है कि दिल मानता नही,
एक आध होता और शायद,
मान भी लेता याद करता नही,
ये शाम के बरसात,
तेरे कांधे का दिल,
हर एक लम्हा बरी मीठी बरसात,
एक अकेली………

एक अकेली सर्द शाम है,
तू नही पर तेरे याद है,
तेरे यादों कि गर्माहट रेंगती है अबतक,
जैसे तू कही आसपास है,
एक अकेली………

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