Beauty Poem – ये रात क्यों घनी होगी – Poem on Love in Hindi

Beauty Poem – Poem on Love in Hindi Beauty Poem ये रात क्यों घनी होगी, कुछ तो दुश्मनी होगी। आग लगा लूँ खुद को, तुझ में रोशनी होगी। रोने लगी हैं दीवारें, खून से सनी होगी। इश्क फिर ज़ुदा कैसे, योजना बनी होगी। छत पे शोर कैसा है, चंदा या चांदनी होगी। क्या ख़ूब रंग

Dua Karo – चिराग बुझ न जाए – Ghazal Poem in Hindi

Dua Karo – Ghazal Poem in Hindi Dua Karo चिराग बुझ न जाए, तुम दुआ करो, सामने मुझे रखो और फिर हवा करो।। कोई किसी को कौन से हद तक याद रहे, तुम भी मुझे वक्त बे वक्त दिखा करो।। मैं रहूँ या ना रहूँ, मेरा ऐब ना रहे, ऐ ख़ुदा मेरे लिए ऐसी सज़ा

Ghazal Poem – कुछ नई तब्दीली आई है – Ghazal Poem in Hindi

Ghazal Poem – Life Poem in Hindi Ghazal Poem मेरी ज़िंदगी में कुछ नई तब्दीली आई है, जब से वो आई हैं एक तफसीली आई है। ज़्यादा खींचूंगा तो ये फट भी सकती है, मेरी किस्मत में जो ख़ुशी हमेशा ढीली आई है। पूरे घर को यूँ ही गीला कर छोड़ा है इस ने, तुम्हारी

Women Poem – बड़ा फर्क था उसमें और मुझमे – Poem on Women

Women Poem – Poem on Women in Hindi Women Poem बड़ा फर्क था उसमें और मुझमे, वो पुरुष था, पौरुष से परिपूर्ण, गंभीर, शांत, स्थिर, सौम्य, भरा सा, और मैं औरत, पत्नी,ब हू, माँ, रिश्तों के फंदे में गूँथी, अस्थिर, गहरी, अशांत, विचलित चित्त, पल में रोना, दूसरे पल हँस देना। जिम्मेदारियों और कर्तव्यपरायणता से,

Manbhavan Sawan Poem in Hindi – बरसात का मौसम – Poem

Manbhavan Sawan Poem in Hindi Manbhavan Sawan Poem बड़ा खूसूरत होता है, बरसात का मौसम। खासकर उन पौधों के लिये, जिनका कोई खैरख्वाह नही होता। होते ही शुरू बरसात , दौड़ पड़ते है सभी नर्सरी में, चुनते है आकर्षक पौधे, सुंदर लाल पीले बैगनी गुलाबी फूल और कलियों से लदे पौधे। उस दौड़ से दूर

Women Empowerment Poem – हर बार इसी तरह – Women Poem

Women Empowerment Poem – Poem on Women in Hindi Women Empowerment Poem हर बार इसी तरह, कभी जानबूझ कर, कभी अनजाने में, दे जाता था कोई न कोई विषय, पागल बन सोचने के लिये। हर रोज बात करना, चर्चा करना राजनीति से लेकर, मनुष्य हृदय, सिनेमा, कोई कहानी, लेखक हो या महानगरों के दमघोटू रोजमर्रा

Fear Poem – उठ बैठती हूँ रोज – Poem on Women in Hindi

Fear Poem – Poem on Women in Hindi Fear Poem उठ बैठती हूँ रोज मध्य रात्रि, उतार फेकती हूं तमाम मुखोटे, बीन लाती हूँ उस अतीत के सघन काले स्याह जंगल से, बीते समय की छाती चीर, यादों की वो लकड़ियां, त्याग रंगीन लिबास, ओढ़ लेती हूं, उस गुजरे लम्हे की दागदार वो काली चादर।

Weaver Poem – यू तो बुनकर है – Poem on Emotions

Weaver Poem – Poem on Emotions Weaver Poem यू तो बुनकर है वो गजब का, रफूगर भी कुछ कम नही, न जाने कहाँ से ले आता है, वो डोरा सपनो का टांक देता है इंद्रधनुषी पैबंद, चीथड़ों पर कुछ इस तरह, कि हों पर सुरखाब के। सृष्टि के “प्रथम” पुरुष सा, नाप लेता है बड़ी

Growing Older Poem – देखा है अक्सर खोजते – Poem in Hindi

Growing Older Poem – Poem in Hindi Language Growing Older Poem देखा है अक्सर खोजते,तलाशते, कुछ बीनते, बटोरते और खंगालते, चालीस, पैतालीस और उसके बाद की स्त्रियों को। बाजार से फल, सब्जी राशन लाती, सब के लिये एक पैर पर खड़े नाचती स्त्तियाँ, खुद को छोड़ सब को तवज्जो देती। चौक जाती है जब, जब

Happiness Poem – कब मिलती है खुशी तुम्हे – Hindi Poem Love

Happiness Poem – Hindi Poem Love Happiness Poem कब मिलती है खुशी तुम्हें, जानना चाहती हूं तुमसे, हाँ, होती है परिभाषा अलग अलग सुख और खुशी की। कुछ विचित्र और विक्षिप्त आदतें है सुख पाने की। बचपन मे अक्सर गिरने से, चोट लग जाया करती थी, हमेशा से घुटने चोटिल, घायल ही रहते है, उनसे

Plant a Tree Poem – कल की ही तो बात वो – Beauty of Nature

Plant a Tree Poem – Poem on Beauty of Nature Plant a Tree Poem कल की ही तो बात वो, आया था घर मेरे, हाँ, वही मेरा पुराना मित्र, जो नही चूकता, एक भी, जन्मदिन पर आना और, कुछ अलग सा तोहफा दे जाना। इस बार सचमुच कुछ, अलग ले आया था वो, जानता था

First Love Poem – देखती हूँ अक्सर – Hindi Poem on Love

First Love Poem – Hindi Poem on Love First Love Poem देखती हूँ अक्सर, लोगो के मन में कसक, अपने उस पहले प्यार की, हो जाता था वो भी उदास, अनमना, निराश याद कर, वो अपना पहला प्यार। न समझ पाई कभी मैं, पहले प्यार का ये फलसफा, प्यार तो प्यार है, न बाट पाई

Zindagi Poem – मुश्किल था अमृता बन पाना – Life Poetry

Zindagi Poem – Life Poetry in Hindi Zindagi Poem हाँ, मुश्किल था अमृता बन पाना, तो कहाँ है आसान इमरोज बन जाना। उगते सूरज और चढ़ती उम्र में तो सब दहकते है, बड़ा मुश्किल है, ढलती शाम उतरती उम्र पे भी, उसका यूँ, निसार हो जाना। गर है कठिन बहुत अपने, प्रेम को दुनिया को

Within Every Woman – हर स्त्री के भीतर – Women Poem

Within Every Woman – Poem on Women in Hindi Within Every Woman हर स्त्री के भीतर, उग आती है, कभी न कभी घास, हरापन लिये, बिना किसी के रोपे, उगाए, होती है, उसकी जड़ें छोटी, कोमल, मुलायम, पतली सी, लेकिन होती है पकड़ उनकी मिट्टी से बहुत मजबूत, उनकी ये जकड़ ही बनाए रहती है

Women Empowerment Poems – प्रथम स्त्री – Women Poem

Women Empowerment Poems – Poem on Women in Hindi Women Empowerment Poems सृष्टि के प्रारम्भ में आया था जब, वह, प्रथम पुरुष, स्वायंभुव मनु, तब ही तो प्रकट हुई थी “शतरूपा”, प्रथम स्त्री, सिर्फ और सिर्फ, उसके लिये। उस प्रथम पुरुष के, जीवन को बनाने पूर्ण। साथ मिल सृजन की, नव सृष्टि सारी, किया जीवन

Problem Poem – उलझन मेरी सुलझा दो – Confusion About Life

Problem Poem – Confusion About Life Problem Poem बड़े पैने है उसके दाँत, लंबे चौड़े चौड़े, बदसूरत। दिखते नही, मुझे, बस, महसूस करती हूं, उनकी चुभन अपनी पीठ पर। ढँका होता है पूरा शरीर, सुंदर आकर्षक वस्त्रों के भीतर, इसलिये ही नज़र नही आते, किसी अन्य को। लोग मिलते है सामने से, हाथ मिलाते है,

Sad Hindi Kavitayen – चटकता है हर रोज कुछ – Hindi Kavita

Sad Hindi Kavitayen – Poem in Hindi language Sad Hindi Kavitayen चटकता है हर रोज कुछ, ढहा ले जाता है एक टुकड़ा मन की मिट्टी का, वो सैलाब आँसुओ का। जो घुमड़ता है भीतर ही भीतर, निकलने नही देती, आँखों के रास्ते वो मजबूत मेड़ लोक लाज की। बस रुँध जाता है गला, और अटक

Inspirational Poem Woman – हॉ, मैं औरत हूँ – Woman Poem

Inspirational Poem Woman – Woman Poem Inspirational Poem Woman हॉ, मैं औरत हूँ, अपना वजूद ढ़ूढती युगों युगों से पहचान ढूढती, विचलित सी, खुद को तलाशती फिर रही हूं, मुझे कभी बेटी, बहन, कभी पत्नी तो कभी मॉ का नाम मिला, न मिल सका तो बस मनुष्य होने की पहचान. हर रिश्ता मुझसे आदर्श की

Faith Poem – अब तुझ सा तू एक बनाऊँगी – Hope Poem in Hindi

Faith Poem – Hope Poem in Hindi Faith Poem अब तुझ सा तू एक बनाऊँगी नहीं अब तुझसे कोई आस, तो क्या हुआ जो नहीं दिखता तुझमे मेरे लिये कोई अहसास तुझ से तू में, वो अनबुझी प्यास मैं जगाऊँगी, हां अपने लिये, सोए हुए तुझमे वो जज़्बात जगाऊँगी। पत्थर ही तो है न तू?

Life Struggle Poem – बिकती कहाँ है जिन्दगी – About Life Poem

Life Struggle Poem – About Life Poem Life Struggle Poem बिकती कहाँ है जिन्दगी बाजारों में, चुन लो यही कही, आस पास के गुलजारो से। ख्वाइश नही कि छू लू अब तारो को यहाँ, चल,कदम दो कदम साथ मेरे, खुद बन जाऊ मैं नीला आसमां। कहता तो है, न ज़ाया कर आंसुओ को इस तरह,