Author: Amresh Kumar Labh

Bravery Poem – पुल – Short Poem on Bravery

Bravery Poem – Short Poem on Bravery Bravery Poem पुल है यह, अबलम्ब है, हर आघात को सहता, दो किनारों को जोड़ता, आज भी, अपने अस्थिपंजरो पर टिका, अंतिम सांस लेने से पहले, अंतिम मुसाफिर को, पार लगा देने को आतुर.

Eid Mubarak Poem – ईद मुबारक – Festival Poem in Hindi

Eid Mubarak Poem – Festival Poem in Hindi Eid Mubarak Poem ईद मुबारक उन बन्धु को, हमें भी जो बन्धु माने, राष्ट्र-प्रेम से ओतप्रोत जो, गद्दारों संग नहीं खड़े. ईद मुबारक उन बहनां को, जो नित्य राखी बांध रही, मोह छोड़ पत्थरवाजों से, रक्षक भाई के साथ खड़ी. ईद मुबारक उन अम्मीजान को, जिनकी नहीं

Father Poem in Hindi – Poem About Fathers Love

Father Poem in Hindi – Poem About Fathers Love Father Poem प्रेरणा के स्रोत परम पूज्य पिताजी को समर्पित सजीव खिलौना ———- क्या सजीव खिलौना! सगे-सम्बंधी, मित्र-शत्रु, सबने खेला, जी भर कर खेला, बिना थके, अनवरत खेलाते, बिना बैट्री का खिलौना, क्या सजीव खिलौना! गजब की परख, हर एक का मन, बहलाने की सनक, खेल

Gratitude Poem – शुक्रगुजार – Poem in Hindi Language

Gratitude Poem – Father Poem in Hindi Gratitude Poem देने को कहाँ कुछ अब! श्रधांजली के सिबा, लेने को आज भी बहुत कुछ, जो जीवनपर्यंत वे देते रहे, और आज भी एक आदर्श बन, जीवन की राह दिखा रहे, बन खुद फ़कीर, कैसे बदले मेरी लकीर, इसी फ़िक्र में धूनी रमाते, हर एक काँटों को चूनते,

Poem Mother – रहस्यमयी माँ – Poem on Mother in Hindi

Poem Mother – Poem on Mother Love Poem Mother नदी किनारे देख भीड़, कदम ठहर गये, न जाने कितनी आशंकाएं, मन में उपज गयी, कौतूहलवस समीप पहुँचा, भीड़ में शामिल हर लोग, दुत्कार रहे थे, एक माँ को, जो बेरहमी से पिटे जा रही थी, अपनी हीं संतान को, माँ की ममता पर, अनगिनत सवाल

Sad Poem – वेदना – Poem on Pain in Hindi

Sad Poem – Poem on Suffering And Pain Sad Poem जीवन, वेदना की एक लम्बी कड़ी, नित्य जुडती एक नई लड़ी, ठीक से होश संभाला भी नहीं, तुतली आवाज अभी, सुधर पायी भी नहीं, कदम अभी भी, लड़खड़ा हीं रहे थे, माँ-बाप के सपने सजने लगे, अच्छी तालीम देने की, सुनहले भविष्य संजोने की, औकात आड़े

Sleep Poem – नींद – Poem on Sleeping Beauty

Sleep Poem – Poem on Sleeping Beauty Sleep Poem नींद बड़ी अनमोल है, सबको इसकी चाह, रात ढले न आई तो, मुश्किल रात गुजार। माँ जब लोरी गाय के, नींद की करे पुकार, सो जावत बच्चें फिर तो, सुध बुध सब बिसराय। मेहनतकश इंसान को, पल में आए नींद, बिस्तर पर ज्योंही लेटे, होते नींद

Wake Up Poem – नींद से जागो – Poem on Future

Wake Up Poem – Vision Poem for The Future Wake Up Poem तोड़ अपना नींद अब तुम, दुर्दशा भारत की देख, शांति कैसे हो रही गुम, जा रहा कहाँ अपना देश। देख कैसे घूम रहें हैं, भेड़िये सरेआम यूँ, नींद से जागे नहीं तो, राह चलना है कठिन। तोड़ अपना नींद अब तुम, एक कदम आगे तो

Festival Poem in Hindi – Poem on Deepawali in Hindi

Festival Poem in Hindi – Poem on Deepawali in Hindi Festival Poem जला डाला उसको! हाँ, उसीको, जिसकी बहन सुर्पनखा, लक्ष्मण को रिझा न सकी, नाक कटवाकर लौटी थी, ललकारी थी भाई के मर्दानगी को, और फिर …………… और फिर, नारी का अपमान का बदला, नारी को अपमानित कर लेने, पहुँच गया था जो सीता के

Betrayal Love Poem – Short Poem on Love in Hindi

Betrayal Love Poem – Short Poem on Love in Hindi Betrayal Love Poem चाहे वेबफा समझो, चाहे विश्वासघाती, कैसे रहता साथ, कुर्सी थी डगमगाती, कल था हाथ इसीलिए पकड़ा, आज इसी ही खातिर, कल था हाथ इसीलिए छोड़ा, आज इसी ही खातिर.

Hindi Kavita – नजरें मिलाकर चुरा ले गए दिल – Short Poem on Love

Hindi Kavita – Short Poem on Love in Hindi Hindi Kavita नजरें मिलाकर चुरा ले गए दिल, छुपे फ़िर रहे कैद होने के डर से। कब तक बचोगे ऐ जान-ए-तमन्ना, आँखे बंद करते हीं आओगे दौड़े। हसरतें पूरी होती है बस स्वप्न में हीं, आँखे न खोलेंगे जो अबकी मिलोगे।

Surprise Poem – हतप्रभ हूँ! – Hindi Poem on Life

Surprise Poem – Hindi Poem on Life Surprise Poem (मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों तथा बिहार के छात्रों के माँग के सन्दर्भ में) हतप्रभ हूँ! उनके बदलते हुये नजरियों को देखकर, कल तक मेरे हित की बात करते थे, सत्तासीन क्या हुये? रंग उनकी बदल गई, मेरी आवाज को, सदैव की तरह, फिर दबाने की

Indian Poetry – प्रधान सेवक – Poem on Politics in Hindi

Indian Poetry – Poem on Politics in Hindi Indian Poetry पिला-पिला कर चाय, दिखाकर अच्छे दिन का सपना, बन बैठे प्रधान सेवक, हाथ मलो अब अपना| स्वामी पड़े घोड़ चिंतन में, सेवक की करने पूर्ति, लाख टके की शूट-बूट, लेने को केवल फ़िरकी| थमा के झाड़ू स्वामी जी को, स्वच्छ करने को देश, भ्रमण पर निकले

Shining India – साइनिंग इंडिया – My India Poem

Shining India – My India Poem Shining India साइनिंग इंडिया देख लिया! अब कब आयेंगे अच्छे दिन? देना तो था छह माह हीं, साल बीत गये पूरे तीन! कालाधन नहीं आया वापस, मंहगाई का क्या कहना? दीन – दुखी तो व्याकुल हैं हीं, रोजगार! दुर्लभ सपना! सिर चढ़ बोल रहे आतंकी, उनपर लगा न कोई

Maa Poem – जब से दुनियाँ छोड़ गयी माँ – Sad Poem in Hindi

Maa Poem in Hindi – Sad Poem in Hindi Maa Poem जब से दुनियाँ छोड़ गयी माँ, व्यर्थ बना अब जीवन है, किसको व्यथा सुनाऊँ अपनी, हर रिस्ता अब फीकी है| सूध नहीं कोई लेनेवाला, इस अनाथ का अब जग में, ममता का सागर जब सूखा, हरियाली कहाँ, फिर चित्तवन में! रहा नहीं अब कोई