Author: Ramji Verma

Short Poem on Journey – ज़िन्दगी बेक़रार सी – Journey Of Life Poem

Short Poem on Journey – Journey Of Life Poem Short Poem on Journey तक़रीर में शामिल, होने लगी तक़रार सी है हो गई है बीच में, कोई खड़ी दीवार सी है रेत काँटे और जंगल उगने लगे ख्यालों में  दिल को लगने लगी हर बात नागवार सी है आईने के अक़्स में सब कुछ लगे

Hindi Poem on Rain – अब की बरसात में – Rain Poem in Hindi

Hindi Poem on Rain – Rain Poem in Hindi Hindi Poem on Rain सपने टपकते रहे उस रात में अब की बरसात में  खुशियाँ सिली सिली सी थोड़ी खिली खिली सी झाँकती मिली सी गीले हुए खतों से अकस्मात में अब की बरसात में आँखें खुली रही थीं सपनों की आहटों से बिस्तर भी बात

Poem on Teacher in Hindi – गुरुवे नमः – Poem About Teacher

Poem on Teacher in Hindi – Poem About Teacher in Hindi Poem on Teacher in Hindi गीली मिट्टी के लोंदे से कच्चे घड़े की परिणिति तुम्हारे कुशल हाथों से  सृजन की पराकाष्ठा है तुम्हारी शक्ति का नियंत्रित दबाव भर देती है चाक की असहमति में निर्माण की चकरघिन्नी तुम्हारे हाथों का स्पर्श और थापियों की

Human Being Poem – परवरदिगार निकला – Hindi poem on Humanity

Human Being Poem – Hindi poem on Humanity Human Being Poem आया था बन के तूफ़ाँ लेकिन ग़ुबार निकला कुछ ऐसा दिलफ़रेब सा अपना प्यार निकला कश्ती किया हवाले जिसे नाख़ुदा समझ कर वो शख़्स समन्दर की लहरों का यार निकला. हमने रखी बचाकर थी दिल में जिसकी पूँजी दौलत नही थी अपनी वह तो

Time Poem in Hindi – ओ समय – Poetry on Time

Time Poem in Hindi – Poetry on Time Time Poem in Hindi ओ समय, सहचर समय, क्यों रहा फिसलता हाथों से लम्हा लम्हा घायल करता, भूले बिसरे जज़्बातों से. समय की फिसलन पर कोई, पॉव न अपना टिका सका सपनों की मरीचिकाओं ने धड़कन को भी दिया थका हुआ सामना जब यथार्थ से, उत्तर पाया

Poem on Abuse – गालियाँ – Relationship Poem

Poem on Abuse – Relationship Poem Poem on Abuse गालियाँ गुजरती हैं रेल सी आधी आबादी के ऊपर क्षत विक्षत करती हुई रिश्तों की मर्यादा को, निरन्तर शब्दों का नंगापन करता है तार तार लैंगिक संवेदना को बार बार बेधती हैं गालियाँ हर बार अपने कृत्य से अनुभूतियों की चेतना को गालियाँ स्त्री अस्मिता का

Poem on Father in Hindi – पिता – Poem About Fathers Love

Poem on Father in Hindi – Poem About Fathers Love Poem on Father in Hindi संबंधों की राह में रह जाता है, पगडंडियों सा उपेक्षित पिता बनकर संबोधन के शब्द सा मुश्किलों के बोझ तले पीड़ा को दबाकर मुस्कराता है. पिता हर दौर में रिश्तों पर ज़रूरतों ने लेप लगाये हैं बढ़ती समझदारी के स्वार्थ

Poem on Disappointment – अपने अंधेरे – Hindi Poem on Life

Poem on Disappointment – Hindi Poem on Life Poem on Disappointment अंधेरे अब भले लगते हैं अंधेरे अब अपने लगते हैं रोशनी से प्रतिस्पर्धा में हर बार  हारते हैं अंधेरे हमारी तरह मगर मिटते नही, संभावनाओं की तरह उजालों की अंधेरगर्दी फैलाने लगी है दहशतें दहशतें खबरों की दहशतें खतरों की दहशतें शराफ़त की दहशतें

Kabita in Hindi – सम्भावनाओं में प्रेम – Poem on Love in Hindi

Kabita in Hindi – Poem on Love in Hindi Kabita in Hindi मसीहा कभी चूकता नहीं उसका अत्याचार कर ही लेता है हर बार चुपके से सपनों का शिकार जीने की नाज़ुक ख्वाहिशें फिर भी उग आती हैं व्यवस्था के मरुस्थल में बार बार साज़िशें जब लगातार करतीं हैं अवहेलना ज़िन्दगी में उम्मीद की तब

Short Poem on Life – आवाहन – Poem Of Life

Short Poem on Life – Poem Of Life Short Poem on Life सम्बन्ध सेतु मिल पार करें अपने निश्चय को प्यार करें जीवन जैसा क्या जीवन में साँसें ले रही उबासी हैं समय गुजरता संशय में बिखरी हर ओर उदासी है छीज रही संवेदना सारी आस्तीन की नफ़रत से आने वाला वक़्त भी लगता गुज़रे

Time Passing Poem – अतीत और अब – Poetry on Time

Time Passing Poem – Poetry on Time Time Passing Poem दौर था वह प्रेम का सब कुछ बस प्रेम था बातों की चहक थी चुप्पियों में प्रेम की  गुलाबों की महक थी पसीने में प्रेम की परीक्षा में प्रेम था प्रतीक्षा में प्रेम था बीते हुए वक़्त की समीक्षा में प्रेम था बिखर गई ख़ुशबू

Mother Love Poem – माँ की बातें – Poem on Mother in Hindi

Mother Love Poem – Poem on Mother in Hindi Mother Love Poem बातों में जीती है माँ पर अपनी बातें कब कहती है, अवसर निकल जाए हाथों से अपनी बातें तब कहती है, इसकी बातें, उसकी बातें, बातों का भंडार है माँ, माँ बोले उस बुत से केवल जिसको अपना रब कहती है, बातों बातों

Hindi Kavita on Love – हाशिये पर प्रेम – Poem on Love in Hindi

Hindi Kavita on Love – Poem on Love in Hindi Hindi Kavita on Love चेहरों की किताबों पर चढ़े वर्क ढक लेते हैं संवेदना की लकीरों को गहरे सागर के भँवर में, डूब कर  बार बार उतराती हैं अनुभूतियाँ अस्तित्व की कशमकश, अक्सर बढ़ा देती है माथे की शिकन क़िस्मत की लकीरों में उत्तर खोजती

Save Earth Poem – धरती की साल गिरह – Hindi Poem on Earth

Save Earth Poem – Hindi Poem on Earth Save Earth Poem – Earth day Poetry कराह रही है धरती उठाकर कन्धों पर बोझ बढ़ती आबादी का आता है देने उलाहना यह दिन, हर वर्ष अपनी बर्बादी का संसाधनों के बे तरतीब दोहन से लगातार घुट रही है धरा यहाँ जो कुछ भी है बुरा है

Hindi Poem on Life is Beautiful – ज़िंदगी काश! – Hindi Poem on Zindagi

Hindi Poem on Life is Beautiful – Hindi Poem on Zindagi Hindi Poem on Life is Beautiful चुपके से आह भरतीं दिल में कई सरगोशियाँ गुम हो गई जाने कहाँ बेताब सी मद होशियाँ आग लगा आशियाँ में सब हाथ अपना सेंकते  इस दौर पर छाई हुई हैं इस क़दर बेहोशियाँ प्यार उनसे करने का