Author: Ramji Verma

Poem on Abuse – गालियाँ – Relationship Poem

Poem on Abuse – Relationship Poem Poem on Abuse गालियाँ गुजरती हैं रेल सी आधी आबादी के ऊपर क्षत विक्षत करती हुई रिश्तों की मर्यादा को, निरन्तर शब्दों का नंगापन करता है तार तार लैंगिक संवेदना को बार बार बेधती हैं गालियाँ हर बार अपने कृत्य से अनुभूतियों की चेतना को गालियाँ स्त्री अस्मिता का

Poem on Father in Hindi – पिता – Poem About Fathers Love

Poem on Father in Hindi – Poem About Fathers Love Poem on Father in Hindi संबंधों की राह में रह जाता है, पगडंडियों सा उपेक्षित पिता बनकर संबोधन के शब्द सा मुश्किलों के बोझ तले पीड़ा को दबाकर मुस्कराता है. पिता हर दौर में रिश्तों पर ज़रूरतों ने लेप लगाये हैं बढ़ती समझदारी के स्वार्थ

Poem on Disappointment – अपने अंधेरे – Hindi Poem on Life

Poem on Disappointment – Hindi Poem on Life Poem on Disappointment अंधेरे अब भले लगते हैं अंधेरे अब अपने लगते हैं रोशनी से प्रतिस्पर्धा में हर बार  हारते हैं अंधेरे हमारी तरह मगर मिटते नही, संभावनाओं की तरह उजालों की अंधेरगर्दी फैलाने लगी है दहशतें दहशतें खबरों की दहशतें खतरों की दहशतें शराफ़त की दहशतें

Kabita in Hindi – सम्भावनाओं में प्रेम – Poem on Love in Hindi

Kabita in Hindi – Poem on Love in Hindi Kabita in Hindi मसीहा कभी चूकता नहीं उसका अत्याचार कर ही लेता है हर बार चुपके से सपनों का शिकार जीने की नाज़ुक ख्वाहिशें फिर भी उग आती हैं व्यवस्था के मरुस्थल में बार बार साज़िशें जब लगातार करतीं हैं अवहेलना ज़िन्दगी में उम्मीद की तब

Short Poem on Life – आवाहन – Poem Of Life

Short Poem on Life – Poem Of Life Short Poem on Life सम्बन्ध सेतु मिल पार करें अपने निश्चय को प्यार करें जीवन जैसा क्या जीवन में साँसें ले रही उबासी हैं समय गुजरता संशय में बिखरी हर ओर उदासी है छीज रही संवेदना सारी आस्तीन की नफ़रत से आने वाला वक़्त भी लगता गुज़रे

Time Passing Poem – अतीत और अब – Poetry on Time

Time Passing Poem – Poetry on Time Time Passing Poem दौर था वह प्रेम का सब कुछ बस प्रेम था बातों की चहक थी चुप्पियों में प्रेम की  गुलाबों की महक थी पसीने में प्रेम की परीक्षा में प्रेम था प्रतीक्षा में प्रेम था बीते हुए वक़्त की समीक्षा में प्रेम था बिखर गई ख़ुशबू

Mother Love Poem – माँ की बातें – Poem on Mother in Hindi

Mother Love Poem – Poem on Mother in Hindi Mother Love Poem बातों में जीती है माँ पर अपनी बातें कब कहती है, अवसर निकल जाए हाथों से अपनी बातें तब कहती है, इसकी बातें, उसकी बातें, बातों का भंडार है माँ, माँ बोले उस बुत से केवल जिसको अपना रब कहती है, बातों बातों

Hindi Kavita on Love – हाशिये पर प्रेम – Poem on Love in Hindi

Hindi Kavita on Love – Poem on Love in Hindi Hindi Kavita on Love चेहरों की किताबों पर चढ़े वर्क ढक लेते हैं संवेदना की लकीरों को गहरे सागर के भँवर में, डूब कर  बार बार उतराती हैं अनुभूतियाँ अस्तित्व की कशमकश, अक्सर बढ़ा देती है माथे की शिकन क़िस्मत की लकीरों में उत्तर खोजती

Save Earth Poem – धरती की साल गिरह – Hindi Poem on Earth

Save Earth Poem – Hindi Poem on Earth Save Earth Poem – Earth day Poetry कराह रही है धरती उठाकर कन्धों पर बोझ बढ़ती आबादी का आता है देने उलाहना यह दिन, हर वर्ष अपनी बर्बादी का संसाधनों के बे तरतीब दोहन से लगातार घुट रही है धरा यहाँ जो कुछ भी है बुरा है

Hindi Poem on Life is Beautiful – ज़िंदगी काश! – Hindi Poem on Zindagi

Hindi Poem on Life is Beautiful – Hindi Poem on Zindagi Hindi Poem on Life is Beautiful चुपके से आह भरतीं दिल में कई सरगोशियाँ गुम हो गई जाने कहाँ बेताब सी मद होशियाँ आग लगा आशियाँ में सब हाथ अपना सेंकते  इस दौर पर छाई हुई हैं इस क़दर बेहोशियाँ प्यार उनसे करने का

Diary Poem – डायरी के पृष्ठ – Memories Poem

Diary Poem – Memories Poem Diary Poem कुछ पुराने पन्ने कुछ पुरानी इबारतें कुछ पुरानी यादें  कुछ पुरानी शरारतें झाँकता है पन्नों की सतह से व्यतीत बन गया कितना कुछ चुपके से अतीत शब्दों की दास्ताँ भी कितनी अज़ीब है दूर होकर भी कोई इतना क़रीब है

Tribute To Soldiers Poem – श्रद्धा सुमन – Poem on Soldiers Sacrifice

Tribute To Soldiers Poem – Poem on Soldiers Sacrifice Tribute To Soldiers Poem मातृभूमि! हाँ मातृभूमि यही था उस मिटटी का नाम जिसके तुम बने थे वह देश प्रेम नारा नही था विचार था जिससे तुम सने थे दो दर्जन वर्षों की ज़िन्दगी जहां जवानी की कोपलें बेताब थीं छूटने को उन्हीं हाथों बहरी व्यस्था

Poem on Holi in Hindi- इस बार होली में- Holi Poem

Poem on Holi in Hindi – Holi Poem Poem on Holi in Hindi आओ गले हंसकर मिलें इस बार होली में चारों तरफ उड़ता रहे बस प्यार होली में दिल में लगी हर बात को जलाकर आग में पिचकारियों से हो प्रेम की बौछार होली में वक़्त की कमी में कुछ वक़्त का भी फेर

Hindi Kavita on Nari – मुझे नहीँ चाहिए – Hindi Poem on Women

Hindi Kavita on Nari – Hindi Poem on Women Hindi Kavita on Nari मुझे नहीं चाहिए तुम्हारे वायदों का सागर जिसमें तैरती हैं सुनहरी मछलियाँ और मै डूब जाती हूँ मुझे नहीं चाहिए अवसर रोटी के लिए चूल्हे में जलने का शाम की प्रतीक्षा और पेट की तरह पलने का मुझे चाहिए आत्म निर्णय का

Poem on Country in Hindi – देश द्रोह का मौसम – Poem About Country

Poem on Country in Hindi – Poem About Country Poem on Country in Hindi आँधियाँ पेड़ों पर नही उगतीं घनघोर उमस की गहराइयों में पनपता है बीज़ ग़ुबार का असन्तोष का पसीना बन जाता है सैलाब, ज्वार का हुकूमत की नाक जब होती है नाकाम पहचानने में पसीने की गन्ध तब उसे मौसम का बदलाव

Poem on God in Hindi Language – नीलकंठ – Poem on Shivratri in Hindi

Poem on God in Hindi Language – Poem on Shivratri in Hindi Poem on God in Hindi Language हर दिन पी कर विष के घूँट विचरण कर रहा है इंसान बेचैन सा न निगल सकता है न उगल सकता है उसे कंठ में रोक कर बन जाता है नीलकंठ सा बस अभिशप्त है, जीने को

Poem on Shivratri in Hindi – हे शिव – Shivratri Poem in Hindi

Poem on Shivratri in Hindi – Shivratri Poem in Hindi Poem on Shivratri in Hindi हे शिव ! तुम इतने अलग हो आडम्बर से कि लगते हो निरन्तर अपने से भांग, धतूरा, गण, जानवर पर्वत, जंगल और ज़हर यहां तक कि तुम्हारा प्रतीक अस्वीकार्य की सारी व्यंजनाएं पाती हैं नई पहचान तुम्हारी महाशक्ति में तुम्हारा

Poem on Valentine Day – आज फिर – Valentine Day Poem in Hindi

Poem on Valentine Day – Valentine Day Poem in Hindi Poem on Valentine Day आज फिर, कितने धोखे, भावनाओं की प्लेट में सजकर आये होंगे आज फिर, साज़िशों ने कदम आहिस्ता बढ़ाये होंगे आज फिर कोई विश्वास, झटके में टूट गया होगा आज फिर कोई,भरोसा चुपके से लूट गया होगा आज फिर कोई, वर्जनाओं से

Short Poem on Loneliness – खोजते रहे – Loneliness Poem

Short Poem on Loneliness – Loneliness Poem Short Poem on Loneliness ज़िंदगी में ख़ुशी का ख़ुमार खोजते रहे आहटों में प्यार की पुकार खोजते रहे मंज़िलों की राह में कारवाँ मिले बहुत  हो सके जो सफ़र में शुमार खोजते रहे मर्ज़ लिए हर तरफ़ मरीज़े इश्क़ हैं बहुत आशिक़ी में इश्क़ का बुखार खोजते रहे

Poem on Dreams – ख़्वाब आँखों में लिए – Short Poem on Hope

Poem on Dreams – Short Poem on Hope Poem on Dreams ख़्वाब आँखों में लिए मंज़िलों की चाह में ख़ानाबदोश हैं ख़्वाहिशें ज़िन्दगी की राह में दस्तूर सब ज़माने के इतने फ़रेबी हो गए मिटने लगे हैं फ़र्क सारे आह में और वाह में देख पाते काश तुम सूनी नज़र की सिसकियाँ छलक रही है