Poem Morning Walk Poem Morning Walk सुबह निकला टहलने गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग हाय हलो स्नेह से आंखें छलछलाई और मैं उनको सहेजे अंजुली में चलता गया चलता गया जहां तितलियों के पांव खुले थे और भवरे तम से निकल कर फूलों से कर रहे थे बात चलते चलते पहुंचा उस स्थल पर जहां सागर