Category: Hindi Poetry

Poem on Dreams – ख़्वाब आँखों में लिए – Short Poem on Hope

Poem on Dreams – Short Poem on Hope Poem on Dreams ख़्वाब आँखों में लिए मंज़िलों की चाह में ख़ानाबदोश हैं ख़्वाहिशें ज़िन्दगी की राह में दस्तूर सब ज़माने के इतने फ़रेबी हो गए मिटने लगे हैं फ़र्क सारे आह में और वाह में देख पाते काश तुम सूनी नज़र की सिसकियाँ छलक रही है

Poem on Daughters in Hindi – बेटियाँ – Hindi Poem on Betiyan

Poem on Daughters in Hindi – Hindi Poem on Betiyan Poem on Daughters in Hindi उतनी ही प्रसव वेदना वही रक्त वही माँस उतनी ही कोमलता वही धड़कनें वही साँस फिर क्यों उसका आगमन जन्म देता है उपेक्षाओं को उसकी परवरिश करती हैं कुछ विकलाँग सोचें अभाव की बैसाखियों को स्वभाव बना कर लेकिन फिर

Poem on Success in Hindi – सफलता का सफर – Journey of Success

Poem on Success in Hindi – Journey of Success Poem on Success in Hindi माना कि मिल जाता हर राह कोई मोड़ है माना कि हारता हर वक़्त कोई होड़ है लेकिन अगर रखना है जीने से तुम्हें वास्ता हर मोड़ से निकलता अक्सर है कोई रास्ता मिला दो आसमां को अपनी कोशिशों में नज़रें

Poem on Politics in Hindi – प्रजातंत्र का प्रहसन – Poem in Hindi

Poem on Politics in Hindi – Poem in Hindi Poem on Politics in Hindi जनतंत्र की समस्याओं को जम्हाइयों में समेटकर भाग्य विधाताओं के गिरोह जनता को बार बार छले हैं अच्छे दिनों के सपने उम्मीद के क़दमों तले हैं लोकतंत्र के चारों पायों की संवेदना विहीन चहल कदमी से आम ज़िन्दगी चौपायों सी बनने

Journey Of Life Poem – सांठ – गांठ – Short Poem on Journey

Journey Of Life Poem – Short Poem on Journey Journey Of Life Poem सपनों के सिरों को समेटने का प्रयास समय के अंतराल में लगा देता है गांठें, अक्सर, ज़िन्दगी के जाल में लादकर गांठों का खुरदरापन, अपने कन्धों पर सम्भावना, उम्मीद के समझौते ढोती है पता नही क्या क्या कुछ कुछ, बहुत कुछ सा

Poem on Black Money in Hindi – काला धन – Hindi Poem on Corruption

Poem on Black Money in Hindi – Hindi Poem on Corruption Poem on Black Money in Hindi ज़रूरतें व्याकुल खड़ी हैं पंक्तिबद्ध होकर भूख के तर्पण की खातिर, भीड़ करबद्ध है, काम छोड़कर और काला धन टहल रहा है, निर्द्वन्द सा बेशर्मियों के उजले लिबास में कहीं कुछ खोट है शायद तुम्हारे प्रयास में बे

Waiting Love Poem – इन्तज़ार में – Waiting Love Poems

Waiting Love Poem – Waiting Love Poems Waiting Love Poem बिखरा हुआ वज़ूद है उजड़े दयार में सहमी हुई सी ज़िंदगी, साँसें उधार में तरबतर हो गए दुनियाँ की तोहमतों से जैसे पसीना निकलता चढ़ते बुखार में आने की आहटें भी उनको न ला सकीं गुज़री है सारी ज़िन्दगी जिनके ख़ुमार में चिराग़ सारे बुझ

Poem About Suicidal Feeling – आत्म हत्या – Poem on Suicide

Poem About Suicidal Feeling  – Poem on Suicide Poem About Suicidal Feeling कैसा लगता है मौत को धड़कनों की आखिरी सलामी देती साँस को कैसा लगता है बरसों से टूटते विश्वास को लेकिन ज़िन्दगी ठहरो ज़रा सा पहले आखिरी अनुभति भी कुछ कह ले आरोप कुछ भी कहते रहें नितांत क्या बचेगा मृत्यु आलिंगनोपरांत कर्तव्य

Poem on Women Empowerment – स्त्री – Poem on Women in Hindi

Poem on Women Empowerment – Poem on Women in Hindi Poem on Women Empowerment तुम्हारे नाम दर्ज़ हैं कितने व्रत, कितने उपवास हर बार कर लेती हो यातनाओं में प्रेम की तलाश स्त्री तुम ज़िन्दगी में अनुभूतियों की व्यथा हो स्त्री तुम संवेदनाओं की जीती जागती संस्था हो क्यों नही होता, कुछ भी तुम्हारा, कभी

Ghazal Poem In Hindi – दौर ए जहान – Ghazal Poetry in Hindi

Ghazal Poem In Hindi – Ghazal Poetry in Hindi Ghazal Poem In Hindi शख़्शियत जितनी मशहूर होने लगी पहचान उतनी मग़रूर होने लगी देखकर वक़्त के मातमी कहकहे ज़िन्दगी कितनी मज़बूर होने लगी सय्याद सब बाग़बाँ बन गए हैं यहाँ रौनक ए फ़िजाँ काफ़ूर होने लगी किया ना अदा नश्तरों ने फ़र्ज़ भी फिर सियासत

Question Poem – अनुत्तरित प्रश्न – Poem in Hindi Language

Question Poem – अनुत्तरित प्रश्न – Poem in Hindi Language Question Poem जलते रावण का पुतला फाड़ निकली उसमे से एक दहाड़ किसकी शामत आई है ये किसने आग लगाई है आख़िर तुम में है राम कौन अनुत्तरित प्रश्न प्रतिध्वनित हुआ कोलाहल फिर हो गया मौन चुप्पी का चढ़ता देख आवरण रूकती सांसों को थाम

Poem on Soul – अंतर्नाद – Poem on Inner Self

Poem on Soul – Poem on Inner Self Poem on Soul शब्दों ने बनाया था मिलकर सम्वाद सेतु सोचों के अंतराल को आपस में जोड़ने हेतु अरसा हुआ गुजरा नहीं कोई कारवां वहाँ से सफर है खड़ा वहीँ शुरू था जहाँ से प्रतीक्षा में शब्द भी जर्जर से होने लगे उम्मीद के प्रहरी भी थक

Poem on Suffering And Pain – पहचान का संकट – Hindi Kavita

Poem on Suffering And Pain – Hindi Kavita Poem on Suffering And Pain समाज ने मठाधीशी सिरों पर सजा रखी हैं कुंठा की पगड़ियाँ जिसकी कसौटी पर घिसी जाती है स्त्री, अनवरत कैद है उसकी पहचान परम्परा की पर्ची मे लिपटी अस्वीकृतियों में जब भी जारी करता है समाज नारी की सफलता का श्वेत पत्र

Poem Of Life – ज़िन्दगी …… रह गई – Short Poem on Life

Poem Of Life – Short Poem on Life Poem Of Life सिसकियाँ सब धरी की धरी रह गईं चोट अपनी खरी की खरी रह गई यूँ फिसलती रही रेत सी ज़िन्दगी दिल की चाहत मगर खुरदरी रह गई यकीन बह गया आंसुओं की धार में फिर भी ऑंखें भरी की भरी रह गईं साँस अटकी

Evening Poem – ये शाम – Evening Poem in Hindi

Evening Poem – Evening Poem in Hindi Evening Poem वक़्त के दरख़्त पर टँगे हुए लम्हों की सच्चाई सपनों के हिमाक़त की निंदा करती है लेकिन जीने की कशमकश दूर कर देती है आँखों से नींद और ख्वाब की ख्वाहिशों को फिर ज़िंदा करती है सूनेपन से सनी हाथ पर हाथ धरे तमाम उम्र गुज़री

Poem on Hope and Faith – ज़िक्र ए वफ़ा – Life Poetry in Hindi

Poem on Hope and Faith – Life Poetry in Hindi Poem on Hope and Faith ज़िक्र ए वफ़ा में उनके मेरा नाम आ गया है अब इश्क़ भी सियासत के काम आ गया है छिपा कर बगल में रखते हैं हरदम छूरियाँ जिनकी ज़ुबाँ पर अक्सर राम आ गया है तोला किये हैं ज़िन्दगी मतलब

Poem on Hope in Hindi – कोई नही – Poem on Hope and Faith

Poem on Hope in Hindi – Poem on Hope and Faith Poem on Hope in Hindi ये शहर है अपना मगर जानता कोई नही शक्लें तमाम रहगुज़र पहचानता कोई नही भटक रही ज़िन्दगी मन्ज़िल की खोज में कारवां मिलते सफर पर रास्ता कोई नही इलज़ाम किसी और पर अपने गुनाह का करते यही सब हैं

Freedom Poem – पूरी आज़ादी – Poem on Freedom

Freedom Poem – Poem on Freedom Freedom Poem तुम्हारी हर आहट पर बाहर निकलकर ठिठक जाती है मायूसी पलकों के छोर पर पीड़ा की अनुभूतियाँ होने लगती हैं निरन्तर गहरी सहनशीलता की परिधि में घुट कर तुम्हारी उपेक्षाओं का विस्तार कितना ही व्यापक क्यों ना हो नाप ही लेगा मेरा संघर्ष उसको आत्मविश्वास की बैसाखियों

Poem on Sympathy – इरोम शर्मिला – Poem on Sympathy In Hindi

Poem on Sympathy – Poem on Sympathy In Hindi Poem on Sympathy सम्वेदनायें मौन थीं आक्रोश ठिठके मिले सुदूर उत्तर पूर्व की सर्द हवाओं में परन्तु तुम्हारा अनावृत्त विरोध कभी ठिठुरा नहीं मौसम के मिज़ाज से काँपा नही तुम्हारा संकल्प कभी प्रतिरोध की आवाज से तुम जलती रहीं निरन्तर सिद्धान्तों के मशाल की तरह ज़िन्दगी

War Poem – युद्ध – Poem on War and Peace

War Poem – Poem on War and Peace War Poem बहुत आसान थे लड़ने अतीत के युद्ध अस्त्र शस्त्रों को होता था पता उन्हें उठना है किनके विरुद्ध शत्रुता की अपनी देश रंग जाति थी प्रतिबद्धता की पहचान भली भाँति थी लेकिन अब शत्रु आते नही बाहर कहीं से यहीं उग आते हैं स्वार्थ की