Complicated Love Poem – सलीब पर प्रेम – Complicated Love

Complicated Love Poem – Poem About Complicated Love

Complicated Love Poem

प्रेम का उद्घोष
अक्सर, जब भी देता है
अपनी अनुभूतियों को शब्द
पगड़ियों की शान और
प्रतिष्ठा की सनक,
तिलमिलाकर, उठा लेते हैं
मर्यादा के ध्वजों को
और बनाकर प्रेम को
सवालों का सलीब
चरित्र को सूली पर चढ़ा देते हैं
फिर डालकर नेपथ्य में
पुरुष की सहभागिता
स्त्री के दामन पर
टांक देते हैं चरित्र हीनता
यह जानते हुए भी कि
स्त्री, अकेले प्रेम नही करती


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