Faith Poem – अब तुझ सा तू एक बनाऊँगी – Hope Poem in Hindi

Faith Poem – Hope Poem in Hindi

Faith Poem

अब तुझ सा तू एक बनाऊँगी
नहीं अब तुझसे कोई आस,
तो क्या हुआ जो नहीं दिखता
तुझमे मेरे लिये कोई अहसास
तुझ से तू में, वो अनबुझी प्यास मैं जगाऊँगी,
हां अपने लिये, सोए हुए तुझमे वो जज़्बात जगाऊँगी।

पत्थर ही तो है न तू?
देख ले आई, एक बड़ी चट्टान,
थाम लिये इन हाथों में,
वो सारे के सारे औजार,
इनसे तराश कर, वो मुजस्समा बनाऊँगी,
हां तुझ जैसा ही एक तू,
एक इतिहास रच जाऊँगी,
पत्थर सा है तू,
तुझे एक नया इंसान बनाऊँगी।

देख, संभल संभल, सहेज सहेज के,
कुछ कुरेद , थोड़ा खरोच के
हल्के-हल्के होले- होले कुछ कठोर प्रहार से
तुझे संवारा और बनाया है,
अपने मुताबिक, कुछ कुछ बदलाव कर एक नया बुत बनाया है।

तेरे ह्रदय मे जो था वो पत्थर सा कठोर, नीरस,
उसकी जगह देख रंगीन मोम सजाया है,
चेहरा बना रही हूँ अब सब तराश लिऐ नाक कान,
इन बेजान आँखों में कुछ रंग,
जीवन के भरने है बस,
और हां माथा भी बना लिया अब तो,
उनमें लकीरे बनानी बाकी है,
बस ख़ुद को लिखने की कोशिश में हूं उनमे अब,
और हां देखो न, हथेलियां भी बना डाली मैने कब की,
बस इन लकीरों, के मोड़, अपनी लकीरो तक मोड़ने हैं बाकी,
कभी माथे की लकीरें मिटाती,
तो कभी हथेली की रेखाये,
मिटा मिटा फिर से बनाती।

बस ये दोनों ही अड़े है जिद पे,
वर्ना तुझ जैसा तू तो कब का बना लिया होता अब तक,
लो फिर से अँधेरा हो चला अब तो,
नही, मैं बिलकुल निराश नहीं,
एकदम हताश नहीं।

कल फिर सूरज की पहली किरण के साथ ही आ जाऊँगी,
नई उम्मीद से, नई उमंग संग उन रेखाओं में,
खुद को ही रच जाऊँगी।
सुन, अब अपने मुताबिक ही तुझ सा तू मैं बनाऊँगी।
तेरी किस्मत में खुद का अब में लिख आऊँगी।


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