Gift Love Poem – मालूम है – Gift Hindi Poem

Gift Love Poem – Gift Hindi Poem

Gift Love Poem

मालूम है
मैं जब भी घर से
दफ्तर के लिए निकलता हूँ,
अक्सर कईं चीजें उठाना भूल जाता हूँ,
कभी अपनी टोपी
और कभी अपना टिफन का डब्बा
कभी कोई ज़रूरी फ़ाइल
और कभी कभी अपने आफिस की चाबी।

मगर आज तक
अगर कुछ नहीं भूला हूँ
तो मालूम है वो कौन सी चीजें हैं,
मेरे कहने पर तुम्हारा दिया हुआ पर्स
जो हमेशा
तुम्हारी मुहब्बत की दौलत से भरा रहता है,
और तुम्हारी दी हुई घड़ी
जो आज तक
मेरे वक्त को थामे हुए है।


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