Hope Poem – काश तुम – Short Poem About Hope

Hope Poem – Short Poem Love

Hope Poem

दर्द उभरकर आह बना, दिल भी सहमा रुख़सत पर
ख़ामोशी से अश्क़ गिरे थे, हाथों में खुले ख़त पर
खालीपन बिखर गया है, मन के सूने आँगन में
बार बार तन्हाई कहती, कितना सुख था बन्धन में
जीवन की आपा धापी में, सदियों पिछड़ गये हम
मंज़िल तो मिल गयी मगर, सपनों से बिछड़ गये हम
यादों से मिलने को जब, लम्हों की सांकल खटकाओगे
बन्द किवाड़ों के अंदर, हर बार हमें तुम पाओगे


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