Life Partner Poem – ओ मेरे जीवनसाथी – Poem in Hindi Language

Life Partner Poem – Poem in Hindi Language

Life Partner Poem

ओ मेरे जीवनसाथी!
क्या तुम जानते हो
मैं तुमसे कितना
प्रेम करता हूँ ?
उतना ही जितना कि
बरगद का सूक्ष्म
सा बीज करता है
अपने भीतर लहलहाते
विशाल वृक्ष से ।
उतना ही जितना कि
एक माँ करती है
अपने नवजात
की मुस्कान से ।
उतना ही जितना कि
एक पिता करता है
अपनी संतान के
भविष्य से।

उतना ही जितना कि
किया होगा मनु
ने श्रद्धा से ।
उतना ही जितना कि
करता होगा एक सर्जक
अपनी कृति से ।
ऐसी और इस जैसी
असंख्य उपमाओं
के बावजूद भी मैं
नहीं कर सकता आंकलित
अपने अपरिमित प्रेम को ।
जानते हो क्यों ?
क्योंकि प्रेम करने वाला
कभी नहीं माप सकता
अपने प्रेम को,
प्रेम की माप का
वास्तविक आंकलन
तो केवल प्रेम
पाने वाला ही
कर सकता है ।
ऐसे में मैं चाहकर
भी नहीं माप
सकता अपने
असीमित प्रेम को
क्योंकि पात्र ही
तय करता है
द्रव्य की मात्रा
द्रव्य नहीं निर्धारित
कर सकता
पात्र की पात्रता.