Life Struggles Poem – अपने हिस्से की खुशियाँ – Life Poem

Life Struggles Poem – Life Poem

Life Struggles Poem

अपने हिस्से की
खुशियाँ
बांध कर
रख दी हैं मैंने
पोटली में
जहाँ से उठाओ
वहीं छोड़ जाना
अपने हिस्से की
सारी तकलीफ़ें
संभाल लूँगी मैं
इन सारी तकलीफ़ों को।
औरत हूँ न!
जन्मजात है मुझमें
ग़म को ख़ुशी की तरह
सीने से चिपकाए
रखने की कला,
बख़ूबी जानती हूँ
दर्द को दिल
के तहख़ाने में
क़ैद कर
चेहरे पर मुस्कराहट की
बारात सजाए रखना।

ओह!
भूल गई,
बहुत भुलक्कड़
हो गईं हूँ इन दिनों
तुम्हें तो जाना है,
आख़िर जाना
ही तो चाहते थे तुम!
लो जाओ अब
और जाते-जाते
पीछे मुड़कर
मत देखने लगना
शायद तुम
जानते नहीं हो
नारी आगे देखने पर
पड़ने लगती है कमज़ोर
और पुरुष पलट कर
पीछे देखने पर ।
अरे!
तुम अभी भी गए नहीं
तुम्हें तो तय
करना है
बड़ा लंबा सफ़र
मेरी छोड़ो, मेरा क्या,
मैं तो अपने
सफ़र की ढलान पर हूँ।


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