Lonely Poems – आलम ए तनहाई – Poem on Life in Hindi

Lonely Poems – Poem on Life in Hindi

Lonely Poems

उँचाइयाँ भी तनहा, हैं गहराइयाँ भी तनहा
भीड़ मे रहकर सदा तनहाईयाँ भी तनहा
रोशनी के मौसम मे हमकदम हरदम बने
आगोश मे अंधेरों के परछाईयाँ भी तनहा
जिनके सुरों ने भरा था ज़िंदगी मे रंग को
कोने मे रहती पड़ी शहनाईयां भी तनहा
भीगते हैं साथ सब बरकतों की बारिश में
ज़िंदगी की ज़ंग मे कठिनाइयाँ भी तनहा
वो खड़े थे साथ मे ज़ारी जहाँ पर ज़शन था
मिली गर्दिश मे हमें रुसवाइयां भी तनहा