Moon Poem – कल फिर तन्हा सा वो चाँद – Moon of My Life

Moon Poem – Moon of My Life

Moon Poem

कल फिर तन्हा सा वो चाँद,
मेरे जैसा था वो चाँद।

हर शब को सहलाया मैंने,
जैसे करता था वो चाँद।

लाखों सितारों की रक्षा में
एक अकेला था वो चाँद।

“दाग लगे है मुझ पे वफ़ा के”
कह कर रोता था वो चाँद।

इस धरती के चक्कर में
जागा रहता था वो चाँद।

आज ही कपड़े पहने हैं,
वरना नंगा था वो चाँद।

एक पते की बात बताऊँ,
मेरा अपना था वो चाँद।