Pen Poem – कलम कुछ और भी लिखती – Poem on Pen in Hindi

Pen Poem – Poem on Pen in Hindi

Pen Poem

कलम कुछ और भी लिखती
अगर तुम कहना चाहते तो
मग़र जब भी लिखा तुमने
महज़ इल्ज़ाम ही लिक्खा।।

मुहब्बत हो रही होती है
कि सपना टूट जाता है
ख़ुदा ने मेरे हिस्से में
अधूरा जाम ही लिक्खा।।

वैसे तो मैं पहले से ही
पूरा लिखा लिखाया हूँ
मगर तुमने भी जब लिक्खा,
बुरा अंजाम ही लिक्खा।।

शहर में रोशनी तो है
मगर ऊँचे में है शायद
ज़मीं पर अब भी दिखता है
महज़ कोहराम ही लिक्खा।।


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