Poem Relationship – हैं रिश्ते यहां सभी – Relationship Poem

Poem Relationship in Hindi

Poem Relationship

हैं रिश्ते यहां सभी स्वार्थ के,
लिए देख मैने संसार के।
बच कर निकल न पाए,
हों जैसे फंदे ये शिकार के।

बिन स्वार्थ के यहां किसने,
जिंदगी के जप किए।
घूमते हैं वृद्ध ही क्यों,
हाथ में लाठी लिए।
है कौन ऐसा इस जंग में,
जिसने नही आंसू पिए।
है रोशनी भी जब तक ही,
जलते हैं तब तक दिए।

सुन शेर की दहाड कब,
सुर बदले है शियार के।
है रिश्ते यहां सभी स्वार्थ के,
लिए देख मैने संसार के।

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