Betrayal Poem – चुभते नहीं अब तो – Betrayal in Love

Betrayal Poem – Betrayal in Love

Betrayal Poem

चुभते नहीं अब तो,
तेरी यादों के नश्तर भी.
बहते नही अब अश्क आखों से,
रिसता है लहू अब इनसे,
हद से बढ़ कर दर्द भी
अब फुगा हो चला है.
जिन्दगी भी अब
हिसाब चुकाने लगी है.
रफ्ता रफ्ता यूँ ,
मुट्ठियों से फिसलने लगी है.
फिर भी ये पथराई,बेजान ऑखे,
न जाने क्यों उस रास्ते को
निहारती है टकटकी लगाए.
अभी भी,कुछ तो सुलग रहा
है भीतर मेरे…
क्यो कि सॉसे अभी भी चल रही है.

Spread the love