Bravery Poem – पुल – Short Poem on Bravery

Bravery Poem – Short Poem on Bravery

Bravery Poem

पुल है यह,
अबलम्ब है,
हर आघात को सहता,
दो किनारों को जोड़ता,
आज भी,
अपने अस्थिपंजरो पर टिका,
अंतिम सांस लेने से पहले,
अंतिम मुसाफिर को,
पार लगा देने को आतुर.