Confusion Poem – क्यों होता है ऐसा? – Confusion About Life

Confusion Poem

Confusion Poem

क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं,
तुम्हारे बिना कुछ भी भाता नहीं,
क्यों खुशियां सारी छिन जाती हैं,
सिर्फ यादें ही बाकी रह जाती हैं,
मन यादों के उस पार जा पाता नहीं,
क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं|

हर तरफ तुम ही तुम हो,
निगाहों में तुम, ख्वाबों में तुम,
हर नजारे में तुम ही तुम हो,
दूर होकर भी पास तुम हो,
ये मन तुम से दूर रह पाता नहीं,
क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं|

तुम्हारा पास रहना अच्छा लगता है,
तुम से बातें करना अच्छा लगता है,
तुम्हारी यादों में खो जाना भी अच्छा लगता है,
तुमसे दूर जाना हमें भाता नहीं,
क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं|

ये दुनियां जो तुम संग हसीं दिखती थी,
ये दुनिया जो तुम संग रंगीं दिखती थी,
क्यों ये मन अब उसे वैसा देख पाता नहीं,
क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं|

दुनियां का शोरोगुल तंग करता है,
अब तो महफिल में भी दम घुटता है,
ये मन कहीं भी शांत रह पाता नहीं,
क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं|

तुम्हारे बिना कुछ भी भाता नहीं,
क्यों होता है ऐसा समझ आता नहीं|