Desh Bhakti Poem in Hindi – भक्ति – Desh Bhakti Kavita

Desh Bhakti Poem in Hindi – Desh Bhakti Kavita

Desh Bhakti Poem

नहीं जरुरी कि बॉर्डर पर तैनात,
हो कर करो देश की सेवा तुम,
नहीं जरुरी की मंदिर जा माला फेर,
टीका लगा के कर भक्ति,
न ही मस्जिद में दुआओ से,
न गुरूद्वारे की गुरबानी से,
न होगी चर्च में प्रार्थनाओं से।

ऐ मानव जब सीख लेगा तू कर्म की भक्ति,
फिर देख तू तर जाएगा,
सोपा गया है जिसे भी जो काम,
जब सच्ची निष्ठा, ईमानदारी से अपना फर्ज निभाएगा,
फिर देख तेरा मन ही मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर बन जायेगा।

जिस महकमे में है, जब उसमे, तन मन से फर्ज निभाएगा,
तो जो हुआ हादसा आज वो, कभी नहीं दुहराया जायेगा,
गर किया होता काम जो ढंग से,
तो न आज ये बिचारे न बिलखते होते।
किसी के सर से, माँ तो किसी के सर से पिता का साया न उठ गया होता,
न होते अनाथ ये बिलखते बच्चे,
कोई अपनी बहन, तो कोई अपने भाई तो कोई रिश्तेदारो के लिये न रो रहा होता।

अब भी चेत, जाग और भाग।
हर बात पर व्यवस्था और सरकार को कोसने से न कुछ होगा,
हर वक़्त तैयार है दूसरो पर उंगली और प्रश्न उठाने को,
कभी तो तैयार रह खुद उत्तर बन जाने को।
देख समाचार और अख़बार अब क्या रोता है।
खा कसम आगे न ऐसा होगा,
निबाहूगा अपना कर्म जो दिया गया होगा।
छोड़ आलस और लापरवाही तुझे अब उठना होगा,
नहीं जरुरत देश के लिये बार्डर पर जाकर बंदूक उठाने की।
बस कर ले कर्म जो सोपा तुझे गया है,
ये ही है संपूर्ण भक्ति।
उस दिन नहीं लेनी पड़ेगी नींद की गोली,
मिला पायेगा आँख अपनी आने वाले पीढ़ी से,
उस दिन ही तू सच्चा भक्त होगा।

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