Father Poem in Hindi – Poem About Fathers Love

Father Poem in Hindi

Father Poem

प्रेरणा के स्रोत परम पूज्य पिताजी को समर्पित
सजीव खिलौना
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क्या सजीव खिलौना!
सगे-सम्बंधी, मित्र-शत्रु,
सबने खेला,
जी भर कर खेला,
बिना थके,
अनवरत खेलाते,
बिना बैट्री का खिलौना,
क्या सजीव खिलौना!
गजब की परख,
हर एक का मन,
बहलाने की सनक,
खेल सके सब ताकि,
अपने मन माफिक,
ललाट पर उभरी लकीरों को पढ़,
रूप बदलता खिलौना,
क्या सजीव खिलौना!
बिना तन का सुध लिए,
बिना मन को टटोले,
खूब खेला,
तब तक खेला,
जब तक टूटा न उसका दम,
आज है कुछ गम,
तो बस इतना कि,
क्या था अजीव खिलौना!