Feeling Love poem – अहसास – Poem Feelings of Love

Feeling Love poem – Poem Feelings of Love

Feeling Love poem

शमां ऐसे जला यारों,
के जगमग हो जाए जहां,
अगर दीपक बुझे कोई,
तो फिर एहसास भी न हो।

छलकती आँख तो यारो,
बयां कर जाती दर्द-ए-दिल,
टपक न पायें आंसू तो,
कहाँ एहसास कुछ भी हो!

गगन में कितने हैं तारे,
सजाते कितने सपनों को,
टूटे कितनें हैं तारे,
कहाँ एहसास किसको है?

राहें जब भी रोके हैं,
मचलती प्यासी नदियों की,
सुनामी क्यों कर आई,
कहाँ एहसास किसको है?

बढ़ा है पाप जब कब भी,
धरा पर, तोड़ कर सीमा,
जलजला तब-तब आया है,
शायद् एहसास कराने को।