Gratitude Poem – शुक्रगुजार – Poem in Hindi Language

Gratitude Poem – Father Poem in Hindi

Gratitude Poem

देने को कहाँ कुछ अब!
श्रधांजली के सिबा,
लेने को आज भी बहुत कुछ,
जो जीवनपर्यंत वे देते रहे,
और आज भी एक आदर्श बन,
जीवन की राह दिखा रहे,
बन खुद फ़कीर,
कैसे बदले मेरी लकीर,
इसी फ़िक्र में धूनी रमाते,
हर एक काँटों को चूनते,
जिन्दगी गुलजार करने को,
गुजार दी अपनी जिन्दगी,
शुक्रगुजार! शुक्रगुजार ऐसे पिता की.