Heart Poems – दिल में ज़ख़्म है – Ghazal Poem in Hindi

Heart Poems – Ghazal Poem in Hindi

Heart Poems

दिल में ज़ख़्म है भी तो दिखा कर क्या फ़ायदा,
जो हमें समझते ही नहीं उन्हें जता कर क्या फायदा।

उनकी नज़रों ने हमारा कत्ल-ए-आम कर दिया,
अब ये तिरछी निगाहें हटा कर क्या फायदा।

आख़िर में दिल का यही हश्र होना था अगर,
सारी दुनिया में एक तुमसे ही दिल लगा कर क्या फायदा।

कितनी खामोशी से इन सिसकियों ने मुझे गुनहगार कर दिया,
अब अदालत में जमानत के लिए शोर मचा कर क्या फ़ायदा।

खैर हम तो बुरे थे, बुरे हैं और बुरे ही रहेंगे ऐ ग़ज़ल,
तुमसे अपना रंग और बुरी आदतों को छुपा कर क्या फायदा।

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