Inspirational Poem – शंखनाद – Poem on Hope and Faith

Inspirational Poem – Poem on Hope and Faith

Inspirational Poem

चल बढ़ साथी! छोडो विलाप,
जरा और जोड़ से फूंक मार,
करदे अब तू यह शंखनाद,
लाने को एक नया प्रभात|

पत्थर पिघले न आँसू से,
अधिकार मिले न भीख माँग,
अब छोड़ आश किन्हीं औरों से,
चल बढ़ आगे सीने को तान|

शोषक को न तू पोषित कर,
सह जुल्म यूँ-हीं चुप-चाप, अरे!
शोषित को ले, चल आगे बढ़,
पाएगा न कुछ खड़े-खड़े|

घिस चुके हैं पुर्जे यंत्र की,
अब नया यंत्र लाना होगा,
हैं भ्रष्ट हो चुके तंत्र भी,
नया तंत्र सृजित करना होगा|