Journey Life Poem – छोड़ जाउँगा – Short Poem on Journey

Journey Life Poem – Short Poem on Journey

Journey Life Poem

चला हूँ हौसला लेकर नई दुनियाँ बसाने को,
फ़क़त इंसान को लेकर, शैतानों छोड़ जाउँगा|

अगर मुराद हो तेरी कि खाएं इमान की रोटी,
फिर तुम भी चले आना, बेईमानों छोड़ जाउँगा|

अमन के तुम पुजारी हो तो फिर तुम भी चले आना,
मगर ए सुन लो दहशतगर्द, तुम्हें मैं छोड़ जाउँगा|

तुम्हारा धर्म मानवता अगर हो तो चले आना,
लड़ें जो धर्म के खातिर उसे मैं छोड़ जाउँगा|

सुनो ए स्वच्छ वायु ,जल तुम्हारा भी यहाँ स्वागत,
प्रदुषण साथ हैं तेरे तो तुमको छोड़ जाउँगा|

मैं तो चला अपनी दुनियाँ, गुजारिस है मेरी आखिर,
कभी आना मेरी दुनियाँ, डगर मैं छोड़ जाउँगा|

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