Life Journey Poem – हैरां हूँ मैं – Life Poetry in Hindi

Life Journey Poem – Life Poem in Hindi

Life Journey Poem

हैरां हूँ मैं, खुद ब खुद, खुद से,
रोज ब रोज ये कौन,
नजर आता है, मुझमें,
न जाने और कितने किरदार है, मुझमे
अब तो बस इस बात से परेशां हूं मैं
तुमसे मिलले का ये क्या हस्र पाया है,
मुझसे ही अनजान, मेरा ही साया है,
आईना भी अब देख, मुस्कुराता है मुझको,
पूछता है, बता, मुझमे देखकर,
ये किसका अक्स नजर आता है तुझको?
आईने को झिड़क, आगे बढ़ जाती हूँ मै,
वो देख न ले, यूँ चोरी से झॉक लेती हूँ उसको,
शातिर है, पकड़ ही लेता है मुझको,

अॉखों मे, झॉक, जान ही लेता
है ,कौन दिखता है मुझको..
सोचती थी, भूल चुकी शर्माना अब तो,
देखो न, ये आईना भी न जाने क्या क्या
दिखाने लगा है, ये लाज से झुकी नजर,
ये लाल से हुए गाल, तुम्हारे ही है,
ये बताने लगा है मुझको
लो,फिर ये नया,
कौन सा किरदार,अब मुझमे नजर आने लगा है…

Spread the love