Love Pain Poem – धीरे धीरे ये दर्द भी बेजुबां हो – Ghazal Poem

Love Pain Poem – Ghazal Poem in Hindi

Love Pain Poem

धीरे धीरे ये दर्द भी बेजुबां हो जाता है,
कुछ भी नहीं कहता सब बयां हो जाता है ।।

तुमसे बिछड़ना भी किसी ज़ख्म से कम नहीं,
और एक एक ज़ख्म जुड़ कर कारवां हो जाता है ।

सुबह उठता हूँ तो तुम्हारी तमन्ना होती है,
रात होते होते सब धुआं हो जाता है ।।

इश्क़ तब इतना खूबसूरत सा लगता है ग़ज़ल,
जब साथ जीने का फैसला हम-ज़ुबाँ हो जाता है ।।

आज कल दिल लगता ही नहीं कहीं पर भी,
हर तरफ लोग होते तो हैं मगर दिल तन्हा हो जाता है।।

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