Love You Poem – Love Between You and Me – Love Poem

Love You Poem – Love Poem

Love You Poem

कुछ तो है, तेरे _मेरे दरमियॉ
न जाने, कौन सी अदृश्य
डोर खीचती है, मुझे तेरी ओर,
कुछ टूटा सा तुझमें है,
कुछ चटका सा मुझमें है.
और कुछ अकेला सा तू है,
कुछ तन्हा सी मैं भी.
कुछ खोजता तू भी है,
और कुछ ढ़ूढ़ती मै भी.
कछ जलता तुझमे है,
कुछ सुलगता मुझमें भी.
कहीं आग तुझमे है,
तो कुछ तपिश मुझमें भी.

कुछ दागदार सा तू ,
कुछ मैली सी मैं भी.
और कुछ उदास सा तू,
कुछ अनमनी सी मैं.
कभी चुप_चुप सा तू,
कभी गुमसुम सी मैं.
कुछ कचोटता है तुझे,
कुछ चुभता सा मुझे.
फिर भी न जाने कहॉ ?
दबी सी, जीने की चाह है
तुझमे भी,
बाकी है कहीं मुस्कुराने की हसरत मुझमे भी..
यूँ ही तो नहीं, टकराते लोग एक _जैसे, जहान मे.
चलो मिलकर मिटा दें,
तेरा _मेरा,
बनाएे नया जहान अपना सा,
अधूरे_अधूरे पूरे, हो जाए.

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