Poem Mother – रहस्यमयी माँ – Poem on Mother in Hindi

Poem Mother – Poem on Mother Love

Poem Mother

नदी किनारे देख भीड़,
कदम ठहर गये,
न जाने कितनी आशंकाएं,
मन में उपज गयी,
कौतूहलवस समीप पहुँचा,
भीड़ में शामिल हर लोग,
दुत्कार रहे थे,
एक माँ को,
जो बेरहमी से पिटे जा रही थी,
अपनी हीं संतान को,
माँ की ममता पर,
अनगिनत सवाल उठ रहे थे,
मेरे मन में भी यही सवाल,
आखिर क्यों माँ का यह निर्दय रूप?
पकड़ लिया उस माँ को,
उसकी ममता की याद दिलाने,
विलख पड़ी वह,
लगी चिल्लाने,
नहीं जानते बाबू तुम इसे,
यह मेरा इकलौता संतान है.

इसके बिना मेरी दुनियां वीरान है,
चले जाता है गहरे पानी में,
और अगर कुछ हो गया तो…..?
कह वह बिखर गई,
जैसे कलेजा फट सी गई हो,
ह्रदय झनक उठा,
महसूस कर उसका दर्द,
जो शायद भीड़ के एहसास से परे था,
उस शैतान को कहाँ कोई देख सका था,
जो काल बन मंडरा रहा था,
उसके संतान को लील लेने को,
और संतान के रक्षार्थ हीं,
माँ को रुद्र रूप धारण करना पड़ा था,
उस शैतान को,
सदा के लिए ख़त्म कर देने को,
अदभुत! माँ का रहस्यमय रूप!