Rumors Poem – बाजार गरम है – Poem About Gossip and Rumors

Rumors Poem – Poem About Gossip and Rumors

Rumors Poem

अफवाहों का बाजार गरम है,
न जाने,
कौन किसको कब,
किसी चौराहे पर घेर ले,
और फिर,
करदे काम तमाम,
बस इसलिए,
सदा साथ रखता हूँ,
टोपी और चन्दन,
जब कभी घिरता हूँ,
यही होता है मेरा अस्त्र,
कभी टोपी तो कभी टिका लगा,
बच निकलता हूँ.