Sleep Poem – नींद – Poem on Sleeping Beauty

Sleep Poem – Poem on Sleeping Beauty

Sleep Poem

नींद बड़ी अनमोल है, सबको इसकी चाह,
रात ढले न आई तो, मुश्किल रात गुजार।

माँ जब लोरी गाय के, नींद की करे पुकार,
सो जावत बच्चें फिर तो, सुध बुध सब बिसराय।

मेहनतकश इंसान को, पल में आए नींद,
बिस्तर पर ज्योंही लेटे, होते नींद अधीन।

मानसिक उलझन में फसे, नींद नहीं फिर आत,
दुःख दर्द गर जब साथ हो, नींद न भटके पास।

बिछुड़े जब प्रेमी युगल, या अनबन हो जाए,
नींद बुलाबे आबे न, कुछ भी नहीं सुहाय।

दिन जिसके पूरे हुए, मोह करे वह भंग,
छोड़ के दुनियाँ वो चले, सदा नींद के संग।