Tea Time Poem – चाय का कप और तुम्हारी यादें – Memories Poetry

Tea Time Poem – Memories Poetry

Tea Time Poem

मैं, पहला चाय का कप और तुम्हारी यादें,
सब कुछ तो वैसा ही है,
न जाने क्यो,
आजकल ये कप कुछ रूठा_रूठा सा फिर रहा है,
मुंह फुलाया सा, कुछ अनमना सा,
शिकायत भरी नजरों से,
नजरे चुराता हुआ सा,
चाहता है, मैं जान भी लूं,
और वो कुछ बताए भी ना,
बडा़ मनाया, बडा़ फुसलाया,
पूछा क्यो फिरते हो यूँ रूठे_रूठे,
नजरे झुकाएे, मुह चढ़ाए बोला,
बहुत बदल गई हो तुम,
साथ तो होती हो, पर पास नहीं,
पहले हर घूंट में, मुझे जीती थी तुम,
पर अब सिर्फ गले से उतारती हो तुम,
न जाने ये कौन आ गया हम

दोनो के दरमियां,
कि हर घूंट उसे जीने लगी हो,
और मुझे सिर्फ पीने लगी हो,
ना जाने क्या, सोचती हो,
मुस्कुराने लगती हो,
मै समझने की कोशिश करूँ
इससे पहले ही,
फिर हलक ले उतार लेती हो..
बहुत अच्छा लगता है तुम्हे यूँ
दुबारा मुस्कुराते देख कर,
सुनों, पर डरता हूँ, इस बात से,
जिसे तुम जीने लगी हो,
क्या वो जान पाया है तुम्हे?
देखो बुरा न मानों फिक्र है तुम्हारी,
मैंने देखे है, या यूँ कहो सिर्फ मैने ही देखे है.

सब घाव तुम्हारे,
महसूस की है हर वो टीस,
जो तुम्हारा मन छलनी कर
जाता था,
उन छालों के निशान,
आज तक मिटे नहीं दिल से मेरे भी,
आज भी याद है मुझे,
किस तरह मुझे सामने रख,
घंटो बदहवास सी देखती रहती थी,
हर गरम घूंट का मजा लेने वाली तुम,
डरने लगी थीं चाय की गरमी से भी,
पता नही सहमी सी तुम क्या क्या सोचा करती थीं,
जब मैं एकदम ठंडा हो के निराश हो जाता,
तो बिना देखे मुझे छोड़, मुड़, चली जाया करती थीं,,
बडी़ मुश्किल से सम्भलते देखा है तुम्हे,
या यूँ कह लो हम_तुम दोनो सामान्य जीवन जीने लगे हैं,

तुम्हारे दु:ख का सहभागी साथी हूँ मै,
तुम्हारा यूँ मुझसे मुंह मोड़ना,
असहनीय है मेरे लिये भी,
सुनों,बस इसीलिए डर गया
था तुम्हे यूँ मुस्कुराता देख के,
सुन के “कप ” की बात चौक
गई मै भी,
इतना प्यार?इतनी फिक्र?
डबडबाई आखों से उसे उठाया, सहलाया और होटो से लगाया,
समझाया, मत कर तू इतनी चिंता,
अब फिर से एेसा कुछ न होने दूंगी,
अपनी सीमा जानती हूँ,लोगों को अब पहचानती हूँ
कोई आए, कोई जाए,क्षणिक है सब,
और सुनो, हर प्यार को एक ही रिश्ते के तराजू मे न तौलो.

कुछ गुमनाम रिश्ते,
यूँ ही मुस्कुराने की वजह दे जाते है,
हॉ कुछ है,जो हंसी छीन,नया सबक दे जाते है,
कड़वी यादों को मिटा आगे बढ़ना है, नये रिश्तों का हाथ
थाम,निरंतर आगे बढ़ना है.
तुम्हारा साथ न छोड़ूगी,
हम यूँ ही साथ थे,रहेगे हमेशा,
सुन मेरी बात वो भी मुस्कुराया,
एेसे मैने उसे मनाया…

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