Tired Poem – थक गया हूँ दौड़ते भागते – Poem on Myself

Tired Poem – Poem on Myself

Tired Poem

थक गया हूँ दौड़ते भागते अब जरा आहिस्ता हो जाऊं,
अलग-अलग रंगों से भरा हुआ गुलदस्ता हो जाऊं।।

नन्हे मुन्ने फुदकते बच्चों के इल्म की खातिर,
अच्छी अच्छी किताबों से भरा मैं बस्ता हो जाऊ।।

मेरे हाथों की लकीरें रहें मेरे ही हाथों में,
काश कि मैं भी एक दिन फ़रिश्ता हो जाऊं।

उन ग़रीबों की पहुँच से इतना दूर क्यों हूँ मैं,
काश मैं इन भूखे पेटों के लिए सस्ता हो जाऊं।।

 

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