Wake Up Poem – नींद से जागो – Poem on Future

Wake Up Poem – Vision Poem for The Future

Wake Up Poem

तोड़ अपना नींद अब तुम,
दुर्दशा भारत की देख,
शांति कैसे हो रही गुम,
जा रहा कहाँ अपना देश।

देख कैसे घूम रहें हैं,
भेड़िये सरेआम यूँ,
नींद से जागे नहीं तो,
राह चलना है कठिन।

तोड़ अपना नींद अब तुम,
एक कदम आगे तो बढ़,
लूट रहे नारी को हैं जो,
कर दे उनका तू अब बद्ध।

नींद से जागो अरे! तुम,
छोड़ जाति धर्म को,
त्याग कर निज स्वार्थ को तुम,
साथ सबको ले चलो।