Youth Poem – नई पीढ़ी – Poem About Youth Today

Youth Poem – Poem About Youth and Age

Youth Poem

नई पीढ़ी पर,
इल्जाम लगते आ रहे,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी से,
कभी कुसंस्कारी का,
तो कभी कुलकलंकित का,
तिरस्कार तो तब और बढ़ जाता है,
जब रचता है वह चक्रव्यूह,
अपने हीं माँ-बाप के बिरुद्ध,
घर निकासी का,
शायद, हम भूल जाते हैं कि,
पैदा होता है आज भी अभिमन्युं,
कोख से हीं बहुत कुछ सीख कर,
अंतर फ़कत इतना है,
अब वह चक्रव्यूह भेदने की नहीं,
रचने की कला सीख आता है.