Prem Poem In Hindi – प्रेम आग के लिए पानी है – Love Poem

Prem Poem In Hindi – Love Poem

Prem Poem

प्रेम आग के
लिए पानी है,
पानी के लिए
आग है ।
बहुत विस्तृत है
फ़लक प्रेम का
जिसकी मात्र
एक बूँद में
समा सकती है
समस्त सृष्टि ।
इतना व्यापक है
प्रेम का वितान
कि यह
समतुल्य है
ईश्वर के
इसके विपरीत
नफ़रत प्रतीक है
प्रेम को अंगीकार
न कर पाने की
अवस्था मात्र की
और विवश हो
क्षणिक परिस्थितियों के
यह करती रहती है
स्वयं को कभी उग्र
तो कभी अति उग्र।

इसके विपरीत
प्रेम तो हमेशा
धनात्मक ही
रहता है
यह कभी ऋणात्मक
हो ही नहीं सकता ।
यह तो निरंतर
बढ़ता जाता है
नित नए-नए
आयाम गढ़ता
जाता है ।
नफ़रत तो
किसी फोड़े में
पड़ी उस
मवाद की तरह है
जो फोड़े में
भरते, पकते
यहाँ तक कि
समाप्त होते-होते भी
केवल दुःख
का ही स्त्राव
करती है ।
प्रेम तो
आनंद की
कलकल करती
नदी है,
सुख का
हिलोरे मारता
सागर है,
मुक्तिमय संतुष्टि
की फुहार है ।
हे मानव! फिर
नफ़रत का
आश्रय क्यों
आओ थाम कर
दामन प्रेम का
मिटा दें
छोटे-बड़े,
अमीर-गरीब,
कुल-जाति आदि
असंख्य भावों को
क्योंकि यही भाव
करते हैं पुष्ट
नफ़रत की भावना को ।
तो आओ!
मिल कर
थामते हैं
प्रेम-पताका, क्योंकि,
यही तो सत्य है,
और यही तो शिव है,
यही तो सुंदर है ।
आख़िर इस
अखिल ब्रह्माण्ड में
केवल प्रेम ही तो
वर्धमान है
.