Sad Love Poem – कुछ आग मेरे भी दिल में है – Love Poetry

Sad Love Poem – Love Poetry

Sad Love Poem

कुछ आग मेरे भी दिल में है, दिखाऊँ क्या?
बताऊँ क्या, बोलो! बोलो! जलाऊँ क्या?

बहुत सताया है मेरी जाँ तुमने आज तक,
अब मेरी बारी है, बताओ! सताऊँ क्या?

शतरंज को यूं ही, खेल से सियासत बना दिया,
अब हटोगे भी, मोहरे बिछाऊँ क्या?

सोया हुआ है मुझमें नशा अभी मुहब्बत का,
तुम अगर तैयार हो तो इसे जगाऊँ क्या?

चिराग जलते थे तो तुम मुस्कुराती थी,
देख लो, इस दिल में भी आग लगाऊँ क्या?

जब तेरी यादों के समंदर में डूब जाता हूँ,
खुदी से कहता हूँ, कोई कश्ती डुबाऊं क्या?

मैंने छुपा के रक्खे हैं तेरी आँखों के सब मोती,
यकीं न हो तो इन्हें अपनी आँखों पे सजाऊँ क्या?


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