Tag: Hindi Poetry

Bharat Mata Poem – भारत माता – Hindi Poem on Bharat Desh

Bharat Mata Poem – Hindi Poem on Bharat Desh Bharat Mata Poem मैने एक दुःसवप्न देखा! भारत माता का आँचल जलता देखा! घिरी थी आग की लपटों मे, खडे थे तमाशबीन चौबारे में! अपनी निर्लजता, वहशीपन, कट्टरता लिये आखों मे, सर्द हवाओं में! भिगीं आँखे, नतमस्तक थी, अविरल अस्रुधार बही अपनी संतानों के आगे बेबस

Heart Poem – दिल की आवाज – Sound Of Heart

Heart Poem – Love Poem – Sound Of Heart Heart Poem खामोश धड़कनों को तू आवाज न देना ! मुहब्बत का नाम लेकर इसे नीलाम न करना! ! गम की इस परछाई को इबादत का नाम मत देना! दिल की इस सिसकती आवाज को, संगीत की तान मत देना!! गर हो सके तो अपनी एक

Human Poem – पहचान हो तो बताना – Hindi language Poem

Human Poem – Hindi language Poem Human Poem एक टुकड़ा भी गैरों को खिला कर देखो, ये ख़ुशी क्या है, पैसों को हटा कर देखो। तुझको दौलत की आरज़ू ने खरीदा है, प्यार की खुशबू को होंठों से लगा कर देखो। हर ज़ुबाँ पर तो नफ़रत के ही किस्से है, अपने ही दिल में मुहब्बत

Humanity Poem – कुछ आग सी है – Poem in Hindi language

Humanity Poem – Poem in Hindi language Humanity Poem कुछ आग सी है मेरे शहर के लोगों में, खुन्नस सी भरी देखी है घर के लोगों में। कुछ दर्द तो बाकी रहा होगा उधर कहीं, जो दर्द आज भी है इधर के लोगों में। उतना नशा नहीं रखते हैं शब के लोग, जितना नशा होता

Lonely Poems – श्याही इश्क के रहमत की – Loneliness Poem

Lonely Poems – Loneliness Poem Lonely Poems श्याही इश्क के रहमत की ख़तम हो गई, कहानी मेरी मुहब्बत की ख़तम हो गई। तमन्ना तो आज भी तेरी ही है दिल में, तमन्ना तेरे घर मे शिरकत की ख़तम हो गई। बार बार तेरे साए को चुरा लेता हूँ मैं, क्या करूँ दर्द नफरत की ख़तम

Give Me Some – हमको कुछ दर्द ऐ जुदाई दे – Ghazal Poem

Give Me Some – Ghazal Poem Give Me Some हमको कुछ दर्द ऐ जुदाई दे, ज़ख्म गहरे हों बस दुहाई दे। अपने कातिल से अब न बोलेंगे, हमको रहमत दे या दवाई दे। हमने भी उनको बड़ा तड़पाया है, हमको भी ऐ कुदरत बेवफाई दे। ऐ मेरी जाने ग़ज़ल यहीं रुक जा, या तो सूली

Like Poem – पसंद करता हूँ – Poem on Myself

Like Poem – Poem on Myself in Hindi Like Poem दुनिया ग़म भुला कर जीना पसंद करती है, और मैं ग़म सजा कर जीना पसंद करता हूँ। दुनिया अश्क-ए-मुहब्बत से डरा करती है, और मैं इन्हीं अश्कों को मिला कर, पीना पसंद करता हूँ। लोगों को बेवफाई हज़म नहीं होती शायद, और मैं बेवफाई सीना

Poem Love – वो दूर होते होते हमसे – Ghazal Poem About Love

Poem Love – Ghazal Poem About Love Poem Love हम को जीना सिखा गए, वो रस्में मुहब्बत निभा गए। जिन्हें अपनो ने दगा किया, वो गैर हमको हँसा गए। वो दूर होते होते हमसे, क्यों हमको अपना बना गए। ये रात इतनी लंबी कैसे, ये दिन हमें क्यों रुला गए। तेरी विदाई में हम न

Humanity Poem – कोई तीखा सा पकवान हो तो – Tell Me a Poem

Humanity Poem – Tell Me a Poem Humanity Poem कोई तीखा सा पकवान हो तो बताना, कभी तुम्हारे यहां जलपान हो तो बताना। आदमी आदमी का यहां कातिल है, आदमियत से कोई अनजान हो तो बताना। ऐ मेरे मालिक मैं तेरे जिस्म का टुकड़ा हूँ, मेरी अपनी कोई पहचान हो तो बताना। अपने ही घर,

Betrayal Poem – अपनी मर्ज़ी से दगा खाने तक – Life Poem

Betrayal Poem – Poems About Betrayal And Heartbreak Betrayal Poem अपनी मर्ज़ी से दगा खाने तक, हम न रोएंगे तेरे आने तक। मुद्दतों बाद तेरा आना हुआ, हम न लौटेंगे तेरे जाने तक। चैन आएगा न सुकूं होगा, तुम को गले से लगाने तक। इस क़दर ज़ख़्म दिए साकी ने, उठ के जा भी न

Memories Tree – यादों का पौधा – Poem on Life in Hindi

Memories Tree – Poem on Life in Hindi Memories Tree तुम्हारी दी हुई चीजों को, मैंने दफ़न कर दिया था, ज़मीन के नीचे, कि जैसे दफन करते हैं एक लाश को, उस के मर जाने के बाद। मैंने सोचा कि ये चीज़े भी मर जाएंगी, जैसे हमारा रिश्ता मर गया, मगर मालूम न था, ये

Praise Poem – बड़ी तारीफें सुनीं थीं – Ghazal Poem in Hindi

Praise Poem – Ghazal Poem in Hindi Praise Poem बड़ी तारीफें सुनीं थीं इन रंग-ए-बहारों की, ये तो क़ब्र निकली, मुझ जैसे हज़ारों की। दाद इस महफ़िल में पनपती ग़ज़लों को ना दो, खिदमत करो तो नंगे पांव खड़े कतारों की। कहीं दूर से एक ख़त आया है “सहर” के नाम, जिसमे खुशबू है मेहताब

Life Change Poem – मिट्टी था मैं मिट्टी से क्यों – Ghazal Poem

Life Change Poem – Ghazal Poem in Hindi Life Change Poem – Hindi Poem मिट्टी था मैं मिट्टी से क्यों चंदन हो गया, एक ही झटके में मैं तेरा दुश्मन हो गया। कल तक तेरे कमरे का मैं गुलदस्ता होता था, आज अचानक बाहर का मैं आंगन हो गया। मुँह दिखाई देकर एक माँ बहू

Ghazal Poem – ज़ख़्म में थोड़ा सा सुधार – Ghazal Poem in Hindi

Ghazal Poem – Ghazal Poem in Hindi Ghazal Poem ज़ख़्म में थोड़ा सा सुधार आया है, मेरी आँखों से लहू का ग़ुबार आया है। रोज ज़ुल्म की दास्ताने कैसे नज़रअंदाज़ करते हो, लो पलट लो पन्ने फिर एक अखबार आया है। तेरे होठों पर तो बमुश्किल ही आता होगा, मगर मेरी ग़ज़लों में तेरा ज़िक्र

Poem Myself – मै कौन हूँ – Who Am I Poem

Poem Myself – मै कौन हूँ – Who Am I Poem Poem Myself – Hindi Poem on Life मै कौन हूँ, एहसास या इन्तजार , विश्वास या तिरस्कार, एक भूल या पश्चाताप! शहर हूँ या शाम , दिवा हूँ या निशा , प्रकाश हूँ या तिमिर, स्वप्न हूँ या हकीकत! मै खुद एक प्रश्न हूँ, दिये

Heart Poems – दिल में ज़ख़्म है – Ghazal Poem in Hindi

Heart Poems – Ghazal Poem in Hindi Heart Poems दिल में ज़ख़्म है भी तो दिखा कर क्या फ़ायदा, जो हमें समझते ही नहीं उन्हें जता कर क्या फायदा। उनकी नज़रों ने हमारा कत्ल-ए-आम कर दिया, अब ये तिरछी निगाहें हटा कर क्या फायदा। आख़िर में दिल का यही हश्र होना था अगर, सारी दुनिया

Marriage Poem – सुना है आज से वो – Ghazal Poem About Love

Marriage Poem – Ghazal Poem About Love Marriage Poem सुना है आज से वो मुस्कुराने जा रही है, नई खुशियां नए ख्वाब सजाने जा रही है।। सुनो ऐ फूल तुम भी काम पर लग जाओ अब, सुना है वो नई दुनिया बसाने जा रही है।। दिल मेरा खुश है वो फिर से हँसेगी रात भर,

Tired Poem – थक गया हूँ दौड़ते भागते – Poem on Myself

Tired Poem – Poem on Myself Tired Poem थक गया हूँ दौड़ते भागते अब जरा आहिस्ता हो जाऊं, अलग-अलग रंगों से भरा हुआ गुलदस्ता हो जाऊं।। नन्हे मुन्ने फुदकते बच्चों के इल्म की खातिर, अच्छी अच्छी किताबों से भरा मैं बस्ता हो जाऊ।। मेरे हाथों की लकीरें रहें मेरे ही हाथों में, काश कि मैं

Thoughtful Poems – क्यों किसी मासूम के साथ – Hindi Poem

Thoughtful Poems – Hindi Poem Thoughtful Poems क्यों किसी मासूम के साथ इस कदर खेला जा रहा है, इंसानियत तो पीछे रह गई और आदमी अकेला है। सच के रास्तों पर इक्का दुक्का ही कोई मिलता है, झूठी बुलंदी पर देखो, पूरा का पूरा मेला जा रहा है। हमने तो बस आवाज़ उठाई थी दरिंदो

Heartbreak Poems – जाओ जा कर कह दो – Ghazal Poem

Heartbreak Poems – Ghazal Poem Heartbreak Poems जाओ जा कर कह दो उन दरिन्दों से, अब हवाएं भी डरने लगी हैं परिंदों से।। ऐ रात अब तेरी हुकूमत नहीं रही, सहर के आगे कुछ न होगा तेरे बाशिंदों से।। तुम मेरे हालात को इतना हल्के में न लो, कितना रोया हूँ रात पूछो मेरे रिन्दों