Tag: Humanity Poetry

Human Life Poem – समझदारी इसी में है – Poem Being Human

Human Life Poem – Poem About Being Human Human Life Poem समझदारी इसी में है कि मैं अपनी गलती मान जाऊं और उस के बाद इस भूल को फिर न दोहराऊं।। भलाई इसी में है कि मेरे हिस्से की सज़ाएं मेरे हक में ही रहें, किसी मासूम पर अब और दिक्कतें न आनी पाएं।। अच्छा

Humanity Short Poem – जब चाँद का ही कोई मजहब नहीं है

Humanity Short Poem Humanity जब चाँद का ही कोई मजहब नहीं है तो इंसां क्यूँ लड़ता है म़जहब के लिए वही चाँद ईद का है वही चाँद करवा चौथका है फिर इंसान क्यूँ मचलता है मज़हब के लिए

Human Nature Poem – क्यों लोग इतने अन्धे है- Humanity in Hindi

Human Nature Poem – Humanity Poetry in Hindi Human Nature Poem सोचता हूं मैं बार- बार, क्यों लोग इतने अन्धे हैं। परख लेते चतुर लोग, इनमें कितने भोले हैँ। भूखे, दरिद्र और स्वार्थी, कितनों के मानव जैसे चोले हैं। अग्यानता के कारण इनके, जीवन का कोई लछय नहीं। लालच देकर इन्हें आज भी, बेशक! ले

Humanity Poem – जो जितने मशहूर हैं – Bad Behavior Poem

Humanity Poem – Bad Behavior Poem Humanity Poem जो जितने मशहूर हैं। देख अपनों से कितने दूर हैं। भूल चुके वो अपनी कहानी। मर गया जैसे आंखो का पानी। छोड दिया देख गांव भी अपना। इनके दर्शन जैसे कोई सपना। ह्रदय का अब काम नहीं है। मानसिक स्तर इतने पर भी वही है। अपनी मस्ती