Tag: Life Poetry

Journey Of Life Poem – सांठ – गांठ – Short Poem on Journey

Journey Of Life Poem – Short Poem on Journey Journey Of Life Poem सपनों के सिरों को समेटने का प्रयास समय के अंतराल में लगा देता है गांठें, अक्सर, ज़िन्दगी के जाल में लादकर गांठों का खुरदरापन, अपने कन्धों पर सम्भावना, उम्मीद के समझौते ढोती है पता नही क्या क्या कुछ कुछ, बहुत कुछ सा

Poem Of Life – ज़िन्दगी …… रह गई – Short Poem on Life

Poem Of Life – Short Poem on Life Poem Of Life सिसकियाँ सब धरी की धरी रह गईं चोट अपनी खरी की खरी रह गई यूँ फिसलती रही रेत सी ज़िन्दगी दिल की चाहत मगर खुरदरी रह गई यकीन बह गया आंसुओं की धार में फिर भी ऑंखें भरी की भरी रह गईं साँस अटकी

Short Poem on Life – दास्तान ए ज़िन्दगी – Poem Of Life

Short Poem on Life – Poem Of Life Short Poem on Life गिरगिट रंग बदलते थे अब इन्सां भी रंग बदलते हैं मतलब को मज़बूरी कहकर जीने के ढंग बदलते हैं रख कर पैर वफ़ा के ऊपर अपनी राह पकड़ने वाले प्रेम के सारे आश्वासन् सुविधा के संग बदलते हैं बहुत लड़ चुके दुनियां से

Poem on Globalization – वैश्वीकरण – Globalization Poems

Poem on Globalization – Globalization Poems Poem on Globalization सपने नहीं उगते भूख की बंजर ज़मीन पर आँतों की ऎंठनो का दर्द आँखों में उतर आता है और आक्रोश पेट के भूगोल में अक्सर बिखर जाता है समय, संवेदना और सरोकार सभी ने छला है जीने के प्रयास को देखते ही देखते ज़िन्दगी का चरित्र विज्ञापन

Poetry on Man – आदमी और सड़क – Poem About a Man With Integrity

Poetry on Man – Poem About a Man With Integrity Poetry on Man आती हुई लगती है सड़क जाती हुई लगती है सड़क सड़क कभी नहीं आती है सड़क कहीं नहीं जाती है सड़क बन जाती है सेतु किनारों की दूरियों हेतु आदमी कब सड़क बनेगा कब दूरियां कम करेगा आदमी का कद सड़क से

Zindagi Poem in Hindi – निन्यान्बे के फेर में – Hindi Poem on Life

Zindagi Poem in Hindi – Hindi Poem on Life Zindagi Poem निन्यान्बे के फेर में ता उम्र तीन पाँच करते रहे छत्तीस के संबंधों को तिरसठ में बदलते रहे और जब तक ये पता चला कि जीवन में दो और दो अक्सर पाँच नहीं होते तब तक ज़िंदगी नौ दो ग्यारह हो गयी

Believe Poem – मैं नास्तिक नही हूँ – Hindi Poem

Believe Poem – Hindi Poem Believe Poem हे परम् पिता तुम्हारे असीमित साम्राज्य का विस्तार तुम्हारी महिमा की प्रवंचना और भय के विधान का गठजोड़ है उसकी दरबारी प्रवृत्तियों में अभय दान के आश्वासन और स्तुतियों के मोड़ हैं तुम्हारी प्रार्थना की पुस्तकों में हमारा निरीह सुख और हमारी प्रार्थना तुम्हारी कृपा के आचरण पर टिका

Life Journey Poem – ज़िन्दगी यूँ ही – Poem About Life Lessons

Life Journey Poem – Poem About Life Lessons Life Journey Poem दिल उजड़ने लगे, गाँव बसने लगे हैं दलदली चाहतों में पाँव धँसने लगे हैं साथ धोखे चले आस्तीन में साँप से वो सफ़र के इरादों को डसने लगे हैं सपने उठा कर बग़ावत का परचम सियासत की चालों में फँसने लगे हैं उम्र देकर शराफ़त

Question Poem – क्या मै गुनहगार हूँ? – Guilty Poem

Question Poem – Guilty Poem Question Poem क्या मै गुनहगार हूँ ? प्रेम की परिभाषा मै ना जानू और मै निःशब्द रह जाउँ तो क्या मै गुनहगार हूँ ? नैन हमारे निर्झर हो जाये, मै हो जाउँ वावरा तो क्या मै गुनहगार हूँ? हर दिन हर पल इंतजार करू,  एक झलक पाने के खातिर तो क्या