Tag: Time Poetry

Anarchy Poem – अराजक समय – Poetry on Time

Anarchy Poem – Poetry on Time Anarchy Poem आख़िर क्यों कुछ भी फ़र्क नही पड़ता सत्य की अभिशप्त कातरता से झूठ की निडर ततपरता से आँखों का स्थाई ख़ौफ चेहरों पर हताशा की लकीर खींचने लगा है संवेदनाओं का आत्म केंद्रित ठहरा जल वीभत्स निरपेक्षता की फसल सींचने लगा है. अवरुद्ध इंसानियत के इस दौर

Poem About Time – और फिर – Poetry on Time Passing

Poem About Time – Poetry on Time Passing Poem About Time फिर टल जाएगा संकट फिर बैठेगा, आयोग फिर होगी, निष्पक्ष जाँच फिर बुझ जाएगी विरोध की आँच फिर सफ़ेद होंगे, कुछ स्याह पन्ने फिर खोजे जाएँगे, बलि के बकरे फिर तय होंगे मछलियों के अपराध, मगरमच्छों के विरुद्ध फिर षड्यंत्र हो जाएगा, दुर्घटना सिद्ध

Time Poem in Hindi – ओ समय – Poetry on Time

Time Poem in Hindi – ओ समय – Poetry on Time Time Poem in Hindi ओ समय, सहचर समय, क्यों रहा फिसलता हाथों से लम्हा लम्हा घायल करता, भूले बिसरे जज़्बातों से. समय की फिसलन पर कोई, पॉव न अपना टिका सका सपनों की मरीचिकाओं ने धड़कन को भी दिया थका हुआ सामना जब यथार्थ

Time Passing Poem – अतीत और अब – Poetry on Time

Time Passing Poem – Poetry on Time Time Passing Poem दौर था वह प्रेम का सब कुछ बस प्रेम था बातों की चहक थी चुप्पियों में प्रेम की  गुलाबों की महक थी पसीने में प्रेम की परीक्षा में प्रेम था प्रतीक्षा में प्रेम था बीते हुए वक़्त की समीक्षा में प्रेम था बिखर गई ख़ुशबू

Passing Time Poem – समय एक उड़ता हुआ परिंदा है – Hindi Kavita

Passing Time Poem – Hindi Kavita Passing Time Poem समय एक उड़ता हुआ परिंदा है जो ऊंचा उड़ता चला जाता है और भी ऊँचा।। पंछी का तो अपना एक घर होता है एक परिवार होता है इसीलिए पंछी लौट आता है अपने क्षितिज को छू कर मगर समय का कोई नहीं होता शायद न घर,

Time Passing – उम्र उड़ती है पतंगों सी – Poem About Time Passing

Poem About Time Passing – Hindi Poetry Time Passing उम्र उड़ती है पतंगों सी, मगर डोरी के बिना, और ये ज़िस्म है कि बस मरना जानता है। दिल का क्या है एक खंडर है खयालों से भरा, एक एहसास है जो तुझमे उतरना जानता है। हवा खुशबू नहीं देती बस इशारा कर देती है, ये