Waiting Poem- प्रतीक्षा – Poem About Hope and Faith

Waiting Poem – Poem About Hope and Faith

Waiting Poem

आना ज़रूर
उसी मोड़ पर
अपने किंतु परंतु को
पीछे छोड़कर
सच है कि
प्रतीक्षा की परछाईयाँ
लंबी होने लगी हँ
लेकिन तुम्हारा आना
होगा उतना ही सच
जैसे निकलता है सूरज
तिमिर की दीवार तोड़कर
हमारे मिलन को साक्षी
होने को खड़ी उत्सुक दिशाएं
मिल रही हैं आपस मे होड़ कर
मैं अब भी खड़ा हूँ
उसी जगह अनवरत
प्रतीक्षा में
विश्वास जोड़ कर
आना ज़रूर
उसी मोड़ पर