Wind Poem – ऐ हवा सुन ले – Ghazal Poetry in Hindi

Wind Poem – Ghazal Poetry in Hindi

Wind Poem

ऐ हवा सुन ले, मेरे बारे में
उन्हें कुछ भी ख़बर मत करना,
जो भी है दिल की कहा सुनी है
भूल से भी इन्हें ज़हर मत करना ।।

मत बतलाना उन्हें कि मैं अब भी
उन्हीं से ख़ुद को आबाद करता हूँ,
कोई भी बात हो सब से पहले
मैं उन्हीं को याद करता हूँ,
मेरी धड़कनों की रफ्तार को
अब उन की नज़र मत करना,
ऐ हवा सुन ले, मेरे बारे में
उन्हें कुछ भी ख़बर मत करना ।।

मत कहना कि मैं ये दर्द लिखता हूँ
क्योंकि मुझे तकलीफ होती है,
बस कह देना कि मैं ये सब लिखता हूँ
क्योंकि मेरी तारीफ होती है,
ज़रा से ज़ख्म के बीज को अब
इतना सींच कर शजर मत करना,
ऐ हवा सुन ले, मेरे बारे में
उन्हें कुछ भी ख़बर मत करना ।।

रंग कुछ देर तक बेरंग दिखते हैं मुझे
जब खयालों में वो संग दिखते हैं मुझे,
पर हक़ीक़त में जब नहीं मिलते वो
मेरे हालात बहुत तंग दिखते हैं मुझे,
कितने हालात बाकी हैं दफ़न करने को
करने तो हैं अभी मग़र मत करना,
ऐ हवा सुन ले, मेरे बारे में
उन्हें कुछ भी ख़बर मत करना ।।

वो ज़रा मुस्कुरा दें तो काफी है
दूर से सर हिला दें तो काफी है
अब तमन्नाएं जला डाली हैं मैंने तो
फिर भी वो कुछ दुआ दें तो काफी है,
मेरे हिस्से की शिकायत को कमरे में रहने दो,
ये गुज़ारिश है कि इन्हें शहर मत करना ।।
ऐ हवा सुन ले, मेरे बारे में
उन्हें कुछ भी ख़बर मत करना ।।

अब तो ये फाँसला भी जैसे समंदर हो गया
जो ज़ख्म दिल के बाहर था वही अंदर हो गया,
आँखों मे पानी, हाथों में अपनी लाश लिए
अब से ये सहर मस्त कलंदर हो गया,
और अब ज़रा तुम भी सुन लो ऐ मुहब्बत
अब मेरे इर्द गिर्द भी बसर मत करना,
ऐ हवा सुन लो, मेरे बारे में
उन्हें कुछ भी ख़बर मत करना ।।


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